For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : बात करते हैं मगर मर के दिखाते भी नहीं

बह्र : 2122 1122 1122 112/22

अश्क़ आँखों में कभी भूल के लाते भी नहीं
और बर्बादियों का शोक मनाते भी नहीं

पूछ कर ज़िन्दगी में लोग जो आते भी नहीं
इतने बेदर्द हैं जाएँ तो बताते भी नहीं

वो ख़ुशी थी कि जिसे रास नहीं आए हम
और वो ग़म हैं जो हमें छोड़ के जाते भी नहीं

लोग चाहत का गला घोंट तो देते हैं मगर
दफ़्न करते भी नहीं और जलाते भी नहीं

जाइए आपका मैख़ाने में क्या काम है जब
ख़ुद भी पीते नहीं औरों को पिलाते भी नहीं

हमसफ़र बन के मेरे साथ में वो चलते हैं
दो घड़ी साथ कभी वक़्त बिताते भी नहीं

लोग जिसके लिए कल जान भी दे सकते थे
सामने उस ख़ुदा के सर को झुकाते भी नहीं

जा रहा हूँ मैं, कभी फिर किसी से मत कहना
बात करते हैं मगर मर के दिखाते भी नहीं

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 62

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Balram Dhakar on October 30, 2018 at 11:57pm

आदरणीय महेंद्र जी, बहुत खूबसूरत गजल हुई है। दाद के साथ मुबारकबाद कुबूल फरमाएं।

सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:17am

आपकी बात से सहमत हूँ आदरणीय निलेश सर। निश्चित ही इसमें "भी" बेहद महत्त्वपूर्ण है और उसका निर्वहन कठिन। मैंने अपनी तरफ़ से देख लिया पर यदि आप यह बता देंगे किस शेर में समस्या आ रही है तो मुझे उसे बदलने में आसानी होगी। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। हार्दिक आभार। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:12am

ग़ज़ल को पसन्द करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय बृजेश जी। हार्दिक आभार। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:10am

बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र जी। हार्दिक आभार। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:09am

सादर आदाब आदरणीय समर कबीर सर। बहुत-बहुत धन्यवाद। हार्दिक आभार। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:08am

सादर आदाब आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी। उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभारी हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:06am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी। हार्दिक आभार। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:05am

हाँ, काफी समय बाद ग़ज़ल लिखना हुआ आदरणीय अजय जी। पूरी कोशिश रहेगी कि इसे जारी रखा जाए। ग़ज़ल की सराहना हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद। हार्दिक आभार। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:03am

सादर आदाब आदरणीय राज़ नवादवी साहिब। सुखन नवाज़ी का बहुत-बहुत शुक्रिया। हार्दिक आभार।

Comment by Mahendra Kumar on October 29, 2018 at 8:02am

सुखन नवाज़ी का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय बसन्त जी। हार्दिक आभार। सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई छोटे लाल जी, सुंदर छंद हुये हैं । हार्दिक बधाई ।"
1 minute ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हुस्न तेरी आशिकी से कौन रखता दूरियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" ( गजल )
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । स्नेहाशीष व मार्गदर्शन के लिए आभार ।"
32 minutes ago
Ajay Tiwari and राज़ नवादवी are now friends
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- फ़लक में उड़ने का क़ल्बो-जिगर नहीं रखता / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल-4 (सब परिंदे लड़ रहे हैं...)
"आदरणीय कमर साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल - 2 ( क़मर जौनपुरी )
"आदरणीय कमर साहब, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"आदरणीय संतोष जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ
"आदरणीय पंकज जी, रदीफ़ और काफ़िया ऐसा चुने जिसमें कथ्य के प्रभावी विस्तार की पर्याप्त जगह हो. शेष…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post किसी के इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक(गजल)
"आदरणीय सतविन्द्र जी, ख़ूबसूरत शेर हुए है. हार्दिक बधाई."
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जु जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
3 hours ago
राज़ नवादवी posted blog posts
3 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६९
"आदाब, मैं स्वयं नहीं समझ पाया। शायद सिस्टम में किसी वजह से मेरी पोस्ट उड़ गई थी, जनाब योगराज जी से…"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service