For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


विलीन ...

क्या
मिटते ही काया के
सब कुछ मिट जाता है
शायद नहीं
जीवित रहते हैं
सृष्टि में
चेतना के कण
काया के
मिट जाने के बाद भी
मेरी चेतना
तुम्हारी चेतना से
अवशय मिलेगी
इस सृष्टि में
विलीन हो कर भी
काया के मिट जाने के बाद

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 134

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mahendra Kumar on January 7, 2019 at 8:28pm

बढ़िया कविता है आदरणीय सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.

//अवश्य मिलेगी//

सादर.

Comment by Samar kabeer on January 7, 2019 at 12:07pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Anvita commented on Anvita's blog post ताना-बाना
"हृदयतल से आपका धन्यवाद ।सादर प्रणाम ।"
42 minutes ago
Anvita commented on Anvita's blog post बेहतर तो
"महोदय, सादर अभिवादन ।प्रशंसा के लिए आभारी हूँ ।"
56 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन बहुत ही प्रेरक रचना है मन खुश हो गया बधाई कुबूल कीजिए"
57 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post ताना-बाना
"आदरणीया अन्विता जी यह कविता हमें बता रही आपके भीतर   कारयित्री भावयित्री प्रतिभा भरी हुई…"
59 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Anvita's blog post बेहतर तो
"हम भी क्या दीवाने निकले,वाह वाह बहुत ही धारदार रचना आदरणीया अन्विता जी दिल से बधाई आपको"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आदरणीय मनन कुमार जी बहुत ही शानदार गजल लिखने के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"आदरणीय अमन सिन्हा जी बहुत वेमिशाल रचना है बार बार पढ़ने को जी कर रहा ऐसे लग रहा जैसे मुँह की बात…"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( अंधी गली के मोड़ पर.....)
"सारे वदन पर बोझ है मिट्टी लदान हैं, हकीकत को बयां करती बहुत ही दमदार गजल आदरणीय गणवीर साहब बहुत…"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - इस तरफ इंसान कड़की में
"गुम हुई मुस्कान कड़की में,आदरणीय राम अवध जी यथार्थ को जमी पर लाकर रख दिया आपने ,सच्चाई को बयां करती…"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहब कमाल की गजल प्रस्तुत की आपने,न बन पाया तेरे जैसा कभी मैं ,बहुत सुंदर मन मगन…"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post उस बेवफ़ा से (ग़ज़ल)
"यूँ जिंदगी से आँख चुराना बहुत हुआ,कमाल की गज़ल आदरणीय रवि भसीन साहब मंत्रमुग्ध हो गया पढ़कर ,दिली…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post रंग काला :
"आ. भाई सुशील जी, अच्छी कविता हुई है। हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service