For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खुशबू से भरा रहता 

वात्सल्य का कंबल

जब तुम थीं माँ

 

झरता रहता हरदम  

तुम्हारा आशीर्वाद

जैसे हरसिंगार

उड़ता रहता हर ओर

तुम्हारे स्मित मुस्कान से  

मधुर मकरंद

उषा की लाली जैसा  

फहर रहा होता

हवा के झोंकों संग   

तुम्हारा रेशमी आंचल

 

 

जीवन-समय का हर सफर  

हर दिन की  बिखरती रौशनी    

हर शाम की गहराइयाँ

दिलाती हैं तुम्हारी याद माँ  

रात की अंधेरी खाइयों में

बिखरती रौशनी सा

दिखाई देता है तुम्हारा चेहरा

तारों की झिलमिल के बीच

टिमटिमाती रहती हो तुम

दिशाभ्रम में दिखाती रास्ता

 

बसी हो तुम माँ

मेरे अन्तर्मन में

झुकता है माँ नमन से मन

 

... मौलिक एवं अप्रकाशित।

Views: 75

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Neelam Upadhyaya on March 27, 2019 at 2:31pm

आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, रचना की प्रशंसा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।

Comment by Neelam Upadhyaya on March 27, 2019 at 2:28pm

आदरणीय सुशिल शर्मा जी, रचना की तारीफ के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।

Comment by Neelam Upadhyaya on March 27, 2019 at 2:26pm

आदरणीय समर कबीर जी, रचना को समय देने के लिए हार्दिक आभार।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 20, 2019 at 12:55pm

वाह उत्तम अतिउत्तम भाव सृजन आदरणीया..

Comment by Sushil Sarna on March 19, 2019 at 4:57pm

आदरणीया नीलम जी इस भावपूर्ण रचना के लिए दिल से बधाई।

Comment by Samar kabeer on March 16, 2019 at 7:35am

मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

प्रवृत्ति (लघुकथा )

‘दीदी, आप अपनी लहरों में नाचती हैं I कल-कल करती हैं I इतना आनंदित रहती हैं, कैसे ?’ -पोखर ने नदी से…See More
8 minutes ago
PHOOL SINGH posted a blog post

सड़क की बेबसी

कभी खूनी, कभी कातिलकभी गुनाहों का मार्ग कहलातीजुर्म को होते देख चीखतीखून खराबे से मैं थर्रातीकभी…See More
11 minutes ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव left a comment for Pratibha Pandey
"आई० आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है  i आपकी लेखनी उर्वर बनी रहे i सादर i "
20 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव and Pratibha Pandey are now friends
20 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का --------------------क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? पलकों के…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर प्रणाम।  ट्रेन में हूँ.. तमिलनाडु एक्सप्रेस में। नई दिल्ली से भोपाल तक। नेट आ-जा रहा है।…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। जी। निरंतरता व आप सभी का सान्निध्य व मार्गदर्शन आवश्यक है। अंतिम दो पंक्तियाँ महज तुकबंदी रह…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"ओबीओ 'चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव का समापन हुआ शुभ, शुभातिशुभ"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ रात्रि।"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहों पर अभ्यास हो, लेकर सुन्दर भाव । बार-बार रचते रहें, और बढेगा चाव ।। आदरणीय भाई शैख़…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"जय हो.. "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। मेरी सहभागिता/अभ्यास रचना पर अपना त्वरित अमूल्य समय देकर.सुंदर प्रोत्साहक प्रतिक्रिया व…"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service