For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल

212 212 212 212

अब नए फूल डालों पे आने लगे
और' भ्रमर फिर ख़ुशी से हैं गाने लगे।

पत्थरों पे हैं इल्जाम झूठे सभी
राही के ही कदम डगमगाने लगे।

रहबरी तीरगी की रहे कर ते जो
अब वो सूरज को दीपक दिखाने लगे।

वादा वो ही किया जो था तुमने कहा
घोषणा क्यों चुनावी बताने लगे।

जिनको सोचा नजर हैं सही रख रहे
गौर कर देखा सारे ही काने लगे।

भैंस बहरी नहीं अब समझ लेगी सब
बीन ये सोच कर फिर बजाने लगे।

बोल जितने कहे उनमें सब सच कहा
ये ख़ता है तेरी तुझको ताने लगे।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 112

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 26, 2019 at 7:15pm

आ. भाई सतविंद्र जी, अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।

Comment by Samar kabeer on March 25, 2019 at 2:24pm

जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'रहबरी तीरगी की रहे कर ते जो'

इस मिसरे का शिल्प कमज़ोर है,यूँ कर लें:-

'रहबरी तीरगी की जो करते रहे'

'जिनको सोचा नजर हैं सही रख रहे
गौर कर देखा सारे ही काने लगे।'

ये शैर भी शिल्प और व्याकरण की दृष्टि से समय चाहता है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post समय पास आ रहा है
"सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र सुरेन्द्र जी।"
23 minutes ago
Bhupender singh ranawat left a comment for Samar kabeer
"आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"आद0 मनोज कुमार अहसास जी सादर अभिवादन। एक बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली आपके हवाले से। बधाई। आद0 समर साहब…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post समय पास आ रहा है
"आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बेहतरीन उम्दा भाव सम्प्रेषण लिए इस रचना पर आपको अनन्त बधाई निवेदित…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (चाहा था हमने जिसको हमें वो मिला नहीं)
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और बधाई का शुक्रिया। सादर"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"आद0 मनोज जी,, समय तो शायद हम सभी के पास नहीं है मित्र। बस इसी भागमभाग में साहित्य रस लेने की…"
1 hour ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post समय पास आ रहा है
"आपका हार्दिक आभार, मित्र लक्ष्मण जी"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post पाप .... (दो क्षणिकाएँ )
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"वाह..वाह..क्या कहने इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई, आ. भाई सर्मेन्द्र जी .."
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (चाहा था हमने जिसको हमें वो मिला नहीं)
"आ. भाई सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन। उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post समय पास आ रहा है
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन। उत्तम रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service