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ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र

1212 1222 1212 22

.

अदा में शोखियाँ मस्ती गुलाबी रंग धरे

ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने

ये हुस्न है या कोई दरिया ही चला आया
है दिल डुबोने को गालों पे इक भँवर ले के

ठुमकने लगते हैं सपने सलोने सरगम पर
वो खिलखिला के हँसे तो लगे सितार बजे

नज़र उसी पे ही सबकी टिकी है महफ़िल में
ये बात और है उसकी निगाहें बस मुझ पे

ज़रा सा छू ने पे छुई मुई समेटे ज्यूँ खुद को
नज़र पड़े तो वो खुद को समेटती वैसे

.

मौलिक-अप्रकाशित

Views: 458

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 25, 2019 at 2:50pm

आदरणीय बाऊजी बहुत बहुत आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 25, 2019 at 2:50pm

आदरणीय बृजेश जी बहुत बहुत आभार

Comment by Samar kabeer on March 20, 2019 at 3:08pm

अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 20, 2019 at 1:04pm

वाह आदरणीय मिश्र जी सुन्दर ग़ज़ल कही है बधाई

कृपया ध्यान दे...

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