For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दर्दों गम से हर कोई बेजार है,

हादसों की हर तरफ़ दीवार है।

 

बिक रहे हैं वो भी जो अनमोल हैं,

 कैसे नादानों का ये बाज़ार हैं।

 

सब्र अब सबका चुका लगता मुझे,

हर बशर लड़ने को बस तैय्यार है।

 

पल में तोला पल में माशा मत बनो,

ये भी जीने का कोई आधार है।

 

मुफलिसी के मारे लगते हैं सभी,

फ़िर भी ये लगते नहीं लाचार हैं।

 

जिसके हाथों में हैं ज्यादा पुतलियाँ,

उनकी ही उतनी बड़ी सरकार है।

 

अब भरोसा भी करें किस पर ‘प्रदीप’

दिल है नादां और जहाँ अय्यार है।

.

-प्रदीप देवीशरण भट्ट- मौलिक व अप्रकशित

02-07-2019

Views: 45

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on July 8, 2019 at 12:16pm

शुक्रिया समर जी, ऐसे ही मार्गदर्शन करते रहिए, बंदा भी कुछ सीख जाएगा।

Comment by Samar kabeer on July 7, 2019 at 12:20pm

जनाब प्रदीप जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'फ़िर भी ये लगते नहीं लाचार हैं'

इस मिसरे में रदीफ़ बदल गई है,देखें ।

'जिसके हाथों में हैं ज्यादा पुतलियाँ,'

इस मिसरे में 'ज़्यादा' की जगह "जितनी'' शब्द उचित होगा क्योंकि सानी में 'उतनी' शब्द है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Balram Dhakar and प्रशांत दीक्षित 'सागर' are now friends
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post जाते हो बाजार पिया (नवगीत)
"आ. भाई धर्मेन्द्र जी, बेहतरीन नवगीत हुआ है । हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..डरावनी सी रात थी बड़ा अजीब ख्वाब था-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. भाई ब्रिजेश जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on dandpani nahak's blog post गज़ल
"आ. भाई दण्डपाणि जी, हार्दिक धन्यवाद।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post विजयदशमी पर कुछ दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post छंद मुक्त कविता : रावण दहन
"आ. भाई गणेश जी , बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"इस जानकारी के लिए बेहद शुक्रिया सर मैं इस शेर पर पुनः विचार करता हूँ सादर"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
""ग़ज़ाला" का अर्थ है हिरन का मादा बच्चा । और "ग़ज़ाल" का अर्थ है हिरन का बच्चा ।"
11 hours ago
विमल शर्मा 'विमल' commented on vijay nikore's blog post ज़िन्दगी का वह हिस्सा
"वाह...अद्भुत बधाई आदरणीय"
17 hours ago
विमल शर्मा 'विमल' posted a blog post

थामूँ तोरी बाँहे गोरी / तिन्ना छंद

2 2 2 2चोरी-चोरी।ओ री छोरी।थामूँ तोरी।बाँहे गोरी।जागे नैना।पूरी रैना।खोएँ चैना।भूले बैना।आजा…See More
17 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना तुझको बुलाऊँ-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बहुत बहुत शुक्रिया मित्र..आमोद"
18 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय सुभाष लखेरा जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service