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इलाज़  - लघुकथा  -

इलाज़  - लघुकथा  -

मिश्रा जी की उन्नीस वर्षीय मंझली बेटी मोहल्ले की पानी की टंकी पर चढ़ गयी और शोले के वीरू स्टाइल में चिल्ला चिल्ला कर सारा मोहल्ला, मीडिया और पुलिस वालों को एकत्र कर लिया।

मसला यह था कि वह किसी गैर जाति के सहपाठी से विवाह करने को उतावली थी।

हालांकि अभी उसकी बड़ी बहिन भी क्वारी थी।घर वाले उसे समझा चुके थे कि पहले बड़ी बहिन का विवाह हो जाने दे फिर तेरे मामले को देखेंगे।लेकिन वह उनकी बात सुनने को तैयार ही नहीं थी।

अपना पक्ष मजबूत करने के लिये इस प्रकार परिवार पर सामाजिक दवाब बनाने की कूट नीति अपनाने का उसका इरादा स्पष्ट झलक रहा था। मुहल्ले के लोग एवम रिश्तेदार उसे समझा रहे थे। लेकिन वह लगातार टंकी से कूदने की धमकी दिये जा रही थी। वह कुछ भी सुनने को राजी नहीं थी। वह केवल अपनी माँग मनवाने को बेचैन थी वह भी अपने पिता के मुख से।

लोगों का,पुलिस का और मीडिया का दवाब पड़ने से उसके पिता उससे बात करने को राजी हो गये। सभी ने उसे आश्वस्त किया कि मिश्रा जी तुमसे बात करने आ रहे हैं। मिश्रा जी भी पानी की टंकी पर चढ़ गये।

नीचे सब लोग अब इस दॄश्य का एक सुखद अंत सुनने और देखने को व्याकुल हो रहे थे।

तभी सब लोग भौचक्के रह गये। देखा कि मिश्रा जी ने अपनी लड़की को एक हाथ से पकड़ कर टंकी से नीचे लटका रखा था।लड़की चीख रही थी।"पापा प्लीज़,पापा प्लीज़|"

"अब क्या हुआ? तुम तो खुद ही कूदना चाह रही थी। तुम शायद हिम्मत नहीं कर पा रही हो? हम तो तेरी मदद कर रहे हैं।"

थोड़ी देर बाद बाप बेटी नीचे उतर आये। मीडिया ने घेर लिया।मिश्रा जी पर सवालों की झड़ी लगा दी,"मिश्रा जी, आप तो एक निष्ठुर एवम कठोर पिता हैं।आपको अपनी बेटी से ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिये?"

"आप मेरी बेटी को कब से जानते हैं?"

"अभी घंटे दो घंटे से।"

"मैं इसे इसके जन्म से जानता हूँ।"

"क्या मतलब?"

"मुझे मेरे परिवार के हर सदस्य की हर बीमारी की केस हिस्ट्री पता है।"

"हम समझे नहीं?"

"आपको समझने की जरूरत भी नहीं है क्योंकि आप लोग तो आग बुझाने के बजाय आग भड़काने में माहिर हो।"

"अब आपका अगला क़दम क्या होगा?"

"मुझे मालूम है कि किस मर्ज़ का क्या इलाज़ है।"

मौलिक, अप्रकाशित एवम अप्रसारित

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Comment by TEJ VEER SINGH on August 10, 2019 at 6:12pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 10, 2019 at 6:12pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 10, 2019 at 6:11pm

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 7, 2019 at 5:50am

आ. भाई तेजवीर जी, सुंदर कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on July 20, 2019 at 8:36pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 20, 2019 at 3:21pm

आदाब। बहुत बढ़िया रचना। अंतिम कथोपकथन महत्वपूर्ण। हार्दिक बधाई जनाब तेजवीर सिंह साहिब।

कृपया ध्यान दे...

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