For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

माँ होती तो ऐसा होता

माँ होती तो ऐसा होता माँ होती तो वैसा होता

खुद खाने से पहले तुमने क्या कुछ खाया "पूछा " उसको 
जैसे बचपन में सोते थे उसकी गोद में बेफिक्री से 
कभी थकन से हारी माँ जब , तुमने कभी सुलाया उसको ?
पापा से कर चोरी जब - जब देती थी वो पैसे तुमको 
कभी लौट के उन पैसो का केवल ब्याज चुकाया होता 

माँ तुम ही हो एक सहारा तब तुम कहते अच्छा होता 
माँ होती तो ऐसा होता माँ होती तो वैसा होता

चलना , फिरना , हसना , रोना ,और खड़े होना पैरो पर 
कितने बाते सीखी तुमने लेकिन याद किया क्या पल भर 
जिन हाथो की पकड़ के अंगुली तुम रहते थे हरदम आगे 
बने सहारा क्या तुम उनका , हार गए वे हाँथ अभागे 
माँ है आखिर कैसे कह दे " निकला मेरा सिक्का खोटा "

मात्र बहाना लगता तब , जब भी उनको देखा रोता 
माँ होती तो ऐसा होता , माँ होती तो वैसा होता 

जब जब गलती की बचपन में माँ ने ओढ़ लिया सब दोष 
कभी चोट जो खाता था तू , माँ खुद करती थी अफ़सोस 
पापा तक जो ले जाती थी भूल गया तू उस डोरी को 
तेरे सपनो पे क़र्ज़ है उसका भूल गया तू उस लोरी को 
तन्हाई में कभी सिरहाने माँ के , आके तू भी सोता 

माँ की तरह तू भी ऐसा फूट फूट न तनहा रोता ,
माँ होती तो ऐसा होता , माँ होती तो वैसा होता

Views: 485

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Bhawesh Rajpal on September 24, 2012 at 4:52pm
वाह ! माँ की ममता का कोई मोल नहीं !
          उसके क़र्ज़ का कोई  तोल   नहीं  !
माँ  की महानता अवर्णनीय है !  बहुत सुन्दर !

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 24, 2012 at 1:02pm

एक सफल पुत्र की एकाकी जीवन को अभिशप्त माँ के प्रति आपके उद्गार भले लगे, अजयजी.  बधाई

Comment by mohinichordia on September 24, 2012 at 5:36am

माँ तो माँ है -माँ है आखिर कैसे कह दे निकला मेरा सिक्का खोटा..माँ की याद दिला दी अजय जी |धन्यवाद

 

Comment by ajay sharma on September 23, 2012 at 10:12pm

sabhi to sadar dhanyavaad 

Comment by Gul Sarika Thakur on September 23, 2012 at 9:33pm

माँ होती तो 

मेरी आंखो के आंसू 

उनके आंखो से बह रहे होते 

सच कहूँ तो बेफिक्र से 

जी रहे होते ..

माँ होती तो 

तो हम यूँ अकेले ना होते 

माँ होती तो ...हाँ माँ होती तो ..

प्र वह नहीं है 

कहीं नहीं है..

आदरणीय ... आपका अभिनन्द ..आपने बहुत कुछ याद दिला दिया। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 23, 2012 at 7:07pm

आदरणीय अजय जी, जब रचना पढ़ने के बाद आखों के कोने भींग जायें, तो कहना ही होगा की रचना अपनी छाप छोड़ने में सफल रही, बहुत बहुत बधाई श्रीमान इस अभिव्यक्ति पर |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
3 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Mar 11
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Mar 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service