For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नहीं बदले हम - डॉo विजय शंकर

समय सरसठ साल
कम नहीं कहलाता है
एक अबोथ शिशु
वयोवृद्ध हो जाता है |
बदले कोई तो दुनियाँ
जहान बदल जाए
न बदले तो जमीं क्या
पावदान न बदल पाये |
बहुत कुछ बदला , नहीं बदला ,
आदमी का आदमी के प्रति रुख
नहीं बदला आदमी का
आदमी के प्रति व्यवहार |
बदले हैं तो उपकरण ,
कपड़े और कीमतें ,
सत्ता के नायक और आका
सत्ता के गलियारों के लोग |
नहीं बदली हमारी दृष्टि ,
न ही हमारी सोच |
सरकार हम बन गए ,
सरकार हम दे न पाये |
आजाद हम हो गए,
आजादी हम दे न पाये |

मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

Views: 597

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 18, 2014 at 12:40pm
कविता तो आपकी सुसंगति में ही सुगठित होगी , साथ बनाये रखिये और ऐसे ही मार्ग दर्शाते रहिये मैं भी प्रयास करूंगा , आदरणीय सौरभ जी ,
सादर .

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 18, 2014 at 12:19pm

मेरे कहे को मान देने के लिए सादर धन्यवाद, आदरणीय.  वस्तुतः मैं  आपके तथ्य से अधिक आपकी कविता के लिहाज पर बातें कर रहा था.

सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 18, 2014 at 12:14pm
आदरणीय सौरभ जी,
आपकी हार्दिक बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद , ह्रदय से .
आपके इंगित और सन्देश , दोनों समझ में हैं . हमारा उद्देश्य भी इंगित करना और सन्देश देना ही होता है , विषय इतना व्यापक है कि कथ्य में कुछ भी लिखा जाए कितना भी लिखा जाए , बहुत कुछ रह ही जाएगा . मैं वैसे भी छोटे-छोटे टुकड़ों में ही लिखता हूँ ताकि अधिक से अधिक लोग चलते-चलते भी एक नज़र डाल लें . प्रसंगतः , एक बात आपके भी ध्यान में आती होगी कि कारगर हो जाए तो एक शब्द भी काफी है , वरना कितने ग्रन्थ पड़े हैं , बस पड़े हैं , जो पढ़ते हैं वो लागू कर नहीं पाते , जो लागू कर सकते हैं वो पढ़ते नहीं , दोनों में कोई तालमेल नहीं .
आपकी पारखी नज़र से कमियां झूट जाएँ ,यह भी तो संभव नहीं , आपके सुझाव सदैव ध्यान देने योग्य होते हैं , मैं भी अवश्य ध्यान दूंगा .
बहुत बहुत धन्यवाद .
सादर .

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 18, 2014 at 11:28am

प्रस्तुति के तथ्य के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय विजय शंकरजी.

किन्तु आपके तथ्य के प्रस्तुतीकरण यानि कथ्य के तौर पर इस रचना को अभी बहुत कसना-सधना है. 

विश्वास है कि आप मेरे सकारात्मक इंगितों और संदेश के मर्म को समझेंगे.
सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 18, 2014 at 8:32am
आपके विचारों से मैं सहमत हूँ , बधाई हेतु धन्यवाद आदरणीय विजय निकोर जी .
Comment by vijay nikore on August 18, 2014 at 3:20am

ऐसा है कि हम मानव प्राय: परिवर्तन लाना चाहते हैं, परन्तु, तब तक जब तक उस परिवर्तन से हमारे अपनी आर्थिक या निजि स्थिति में कोई कमी न आए।

सामयिक विषय पर सुन्दर रचना गढ़ी है। बधाई, आदरणीय विजय जी। 

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 17, 2014 at 8:08pm
बहुत सही पकड़ है आपकी आदरणीय लक्षमन प्रसाद लाडीवाला जी , बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद .
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 17, 2014 at 6:26pm

स्व+तंत्र = स्वतंत्र हम हो गए सड़सठ साल हो गए पर दे न पाए स्वतंत्रता | सुन्दर और चिन्तन परक रचना के लिए बधाई 

डॉ विजय शंकर जी | सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 16, 2014 at 9:08pm
आदरणीय सविता मिश्रा जी , बहुत बहुत धन्यवाद .
Comment by savitamishra on August 16, 2014 at 7:29pm

bahut khubsurt _/\_

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Wednesday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service