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गरीबी - उपचार -- डॉo विजय शंकर

किसी ने गरीब को
एक जोड़ी चप्पल दिला दी
किसी ने भूखे को एक वक़्त
शानदार रेस्त्रां में रोटी खिला दी ,
रेस्त्रां के मालिक ने
खाने के पैसे नहीं लिए
कहा , मानवता के पैसे नहीं लगते ,
कुछ इस तरह एक छोटे गरीब ने
एक बड़े गरीब की गरीबी मिटा दी ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on July 3, 2017 at 12:21pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर साहिब आदाब,बहतरीन तंज़ करती एक उम्दा कविता से रूबरू कराया आपने,कविता छोटी ज़रूर है लेकिन इसका असर दिल की गहराइयों तक हो रहा है,इस शानदार प्रस्तुति पर ढेरों बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on July 3, 2017 at 10:55am
आदरणीय विजय शंकर जी आदाब,बहुत ही बेहतरीन कटाक्ष । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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