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कौन कब किसको रोक पाता है -- डॉo उषा चौधरी साहनी

 
न जाने ऐसा क्यों लगता है , 
किसी एक पल कि सबकुछ 
अपना है, अपने हाथों में है, 
बस , हाथ उठाऊं और ले लूँ , 
समेट लूँ , अपनी बाँहों  में ,
रख लूँ ,सहेज कर अपने पास । 
कितनी खुशियाँ हैं दुनियाँ में , 
सब मेरे लिए , कितनी अपनी हैं ,
पर, दूसरे ही क्षण लगता है , 
नहीं,अपना तो कुछ भी नहीं , 
सब एक धोखा  है, भ्रम  है | 
आईना देखूँ तो खुद पर , 
अपने ही  रूप - रंग पर , 
गुमान होता है ,अभिमान होता है, 
आँखे बंद कर के सोचूँ , 
तो यह भी एक धोखा लगता है , 
सच का संज्ञान होता है , 
पकड़ लेने से क्या मिल पाता है, 
बाँध लेने से क्या अपना हो जाता है।  
जीवन में क्या कुछ नहीं आता , जाता है , 
कितना ठहर पाता  है , कितना चला जाता है, 
कौन क्या रोक पाता  है , कहाँ रोक पाता  है ।
सब , बस  खुद ही भटक रहें हैं , 
किसको अपनी मंजिल का पता है, 
कौन कब किसको रोक पाता है , 
कौन कब  किसको रोक पाता है ॥
 
// मौलिक एवं अप्रकाशित //

 

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Comment

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Comment by Usha Choudhary Sawhney on February 23, 2015 at 12:17pm

आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी , बधाई के लिए हृदय से धन्यवाद।  

Comment by Usha Choudhary Sawhney on February 23, 2015 at 12:16pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी , बधाई के लिए हृदय से धन्यवाद। 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 23, 2015 at 2:24am

आदरणीया डॉo उषा चौधरी साहनी जी, बहुत बहुत बधाई सुन्दर प्रस्तुति है , सादर।

आईना देखूँ तो खुद पर , 
अपने ही  रूप - रंग पर , 
गुमान होता है ,अभिमान होता है, 
आँखे बंद कर के सोचूँ , 
तो यह भी एक धोखा लगता है , 
सच का संज्ञान होता है , .....सुन्दर लिखा है आपने !
Comment by Dr. Vijai Shanker on February 22, 2015 at 10:45pm
" सब , बस खुद ही भटक रहें हैं " बहुत ही सुन्दर , आदरणीय डॉo उषा चौधरी साहनी जी, बहुत बहुत बधाई आपको आपकी इस गंभीर प्रस्तुति पर, सादर।
Comment by Usha Choudhary Sawhney on February 22, 2015 at 9:16pm

आदरणीय गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, सादर  धन्यवाद।

Comment by Usha Choudhary Sawhney on February 22, 2015 at 9:15pm

आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी, सादर  धन्यवाद। 

Comment by Usha Choudhary Sawhney on February 22, 2015 at 9:14pm

आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी, सादर  धन्यवाद। 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 22, 2015 at 6:28pm

महनीया

एक अच्छी प्रस्तुति  i सादर i

Comment by maharshi tripathi on February 22, 2015 at 6:13pm

सुन्दर रचना आ. उषा जी |बधाई स्वीकार हो |

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