अरुण कुमार पाण्डेय "अभिनव" आज के दिन आपके जीवन में , खुशियों के संग आये बैभव , आप के आने से OBO पे , आया ब्लॉग अनुपम नव नव , सविकार करे आप प्यार हमारा , दोस्ती पे हैं निछावर तन मन , जनम दिन मुबारक हो मेरे दोस्त , अरुण कुमार पाण्डेय "अभिनव"
At 12:11am on December 13, 2010, विवेक मिश्र said…
अरुण जी,
सर्वप्रथम आपकी रचना को 'महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग' चुने जाने पर हार्दिक बधाई. निःसंदेह आपकी रचनाएँ जबरदस्त ख्यालों से भरी होती हैं. OBO के इस मंच का आभारी हूँ कि आप जैसे गुणी जनों से परिचय हुआ. भविष्य में भी इसी प्रकार आपकी कलम से मोती निकलेंगे, ऐसी आशा है.
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
Abhinav Arun's Comments
Comment Wall (83 comments)
You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online
आज के दिन आपके जीवन में ,
खुशियों के संग आये बैभव ,
आप के आने से OBO पे ,
आया ब्लॉग अनुपम नव नव ,
सविकार करे आप प्यार हमारा ,
दोस्ती पे हैं निछावर तन मन ,
जनम दिन मुबारक हो मेरे दोस्त ,
अरुण कुमार पाण्डेय "अभिनव"
अरुणजी आपकी रचनाएँ अब मैंने पढ़ना शुरू किया है , बड़ी गहराई है इनमें ,चिंतन की ओर प्रवृत्त कटी हैं, साधुवाद.
अरुण जी,
सर्वप्रथम आपकी रचना को 'महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग' चुने जाने पर हार्दिक बधाई. निःसंदेह आपकी रचनाएँ जबरदस्त ख्यालों से भरी होती हैं. OBO के इस मंच का आभारी हूँ कि आप जैसे गुणी जनों से परिचय हुआ. भविष्य में भी इसी प्रकार आपकी कलम से मोती निकलेंगे, ऐसी आशा है.
आपका अपना ही--
विवेक मिश्र 'ताहिर'
सदर प्रणाम
आपकी रचना पढ़कर संतोष होता है
अच्छा लगा
आप रचना के माध्यम से जो परिवर्तन लाना चाहते हैं
उसे साकार होते हुए हम देखतें हैं
बाला लखेन्द्र
Happiness Quotes | Forward this Graphic
सदस्य टीम प्रबंधनRana Pratap Singh said…
Welcome to
Open Books Online
Sign Up
or Sign In
कृपया ध्यान दे...
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
6-Download OBO Android App Here
हिन्दी टाइप
देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...
साधन - 1
साधन - 2
Latest Blogs
सांकल मन के द्वार पर
हरिगीतिका छंद
दोहा पंचक - - - - शोखी
चौपाइयाँ
बरसात
दोहा सप्तक. . . .मंच
रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
दास्तां
समय
माँ
बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
गन्ने की खोई
मशीनी मनुष्य
गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
प्यार का पतझड़
दोहा दशम. . . . . उम्र
कुंडलिया
प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
दोहा सप्तक. . . .विविध
दोहा पंचक. . . . .अधर
Latest Activity
सदस्य टीम प्रबंधनSaurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
सदस्य टीम प्रबंधनSaurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
सदस्य टीम प्रबंधनSaurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
सदस्य टीम प्रबंधनSaurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
सांकल मन के द्वार पर
कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. (कजरी)
हरिगीतिका छंद