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मेरा पैगाम बाक़ी है|- बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

अरकान- 1222     1222     1222     1222

                    

 

सुनो सब गौर से वीरों मेरा पैगाम बाक़ी है|

न हारो हौसला अपना अभी तो लाम बाकी है|

 

मैं आकर मैकदे में अब बता कैसे रहूँ प्यासा,

पिला दे जह्र ही साक़ी अभी इक जाम बाक़ी है|

 

जमीं से तोड़कर रिश्ता बहुत आगे निकल आया,

मगर हालत कहते हैं अभी अंजाम बाकी है|

 

गए पकड़े वो सारे जो बहुत मासूम थे यारो,

सही कातिल का लेकिन इक सियासी नाम बाक़ी है|

 

नही छू पायेगा दामन तुम्हारा कोई भारत माँ,

शहीदों में अभी मेरा कहीं इक नाम बाक़ी है|

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 20, 2015 at 10:39am

आदरणीय भंडारी साहेब ...... बहुत-बहुत शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 20, 2015 at 7:52am

जमीं से तोड़कर रिश्ता बहुत आगे निकल आया,

मगर हालत कहते हैं अभी अंजाम बाकी है|

नही छू पायेगा दामन तुम्हारा कोई भारत माँ,

शहीदों में अभी मेरा कहीं इक नाम बाक़ी है|      --- लाजवाब !! आदरणीय बैज नाथ भाई , बहुत बहुत बधाई ।

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 17, 2015 at 5:51pm

आदरणीय मिथिलेश जी ..... हौसला अफजाई के लिए बहुत - बहुत शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 17, 2015 at 5:07pm

आदरणीय बैजनाथ जी बढ़िया ग़ज़ल हुई है. शेर दर शेर दाद हाज़िर है हालत को हालात कर लीजियेगा सादर

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