For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लोकपाल बिल पे आप लोगों की राय चाहिए

दोस्तों लोकपाल बिल पे आप लोगों की राय चाहिए , अन्ना हजारे और सरकार के बिच जो द्वन्द युद्ध चल रहा हैं , वह देश हित में सही हैं या गलत , सही हैं तो क्यों गलत हैं तो कैसे ,

Views: 2016

Reply to This

Replies to This Discussion

वन्दे मातरम गुरु जी,


आपका सवाल है की देश हित में लोकपाल पर चल रहा द्वन्द युद्ध सही है या गलत?


गुरु जी देश हित के लिए अन्ना की पहल जिसे सरकार की बेईमानी ने एक युद्ध का रूप दे दिया है, बेहद जरूरी है एक अच्छा लोकपाल बनना ही चाहिए ....... और इसके दायरे में चपरासी से लेकर प्रधान मंत्री तक, जनता से लेकर नेता तक सब आने  ही चाहिए....... हर बेईमान के लिए एक कठोर सजा का प्रावधान होना ही चाहिए...... कोई भी भ्रष्टाचारी बचना नही चाहिए........

अन्ना ने एक अलख जगाई है ......... हमे आगे आकर इसमें अपना योगदान अवश्य ही करना चाहिए ........ बल्कि एक सुंदर भारत के लिए हमे इस आन्दोलन को इतना सशक्त बनाना होगा की सरकार किसी भी तरह इस आन्दोलन को कुचलने के बारे में सोच भी ना सके.


जय हिंद जय भारत

राकेश जी आपकी बातों से मैं सहमत हूँ तो क्यों न हम OBO पे भी अलख जगाएं ,

Dear Rakesh ji

                       I am too young for this discussion but by my thoughts we have to stand for purify our soul first. Mr Hazare is fighting with Government only but he can not change our dirty mind. We have to burn the candle of truth and fairness in our soul in spite of any pilgrims.

After that only we can win with curruption.

                                                                                                       Nitish

yes mr. nitish . i agree with you 

"Too young you are..."

 

I don't know what your age is, bro,  your sentences are convincing and encouraging.

You should, please, know, young minds only, but, can take and balance the leading torch in hand to usher in the entire society to a coveted world. Enlisted here are a few to keep you remembered.. Khudiram, Jatindas, Bhagat... all of them were below 25 yrs, bubbling with energy and nascent zeal, and could take on the brutal Britishers. ..

Thanks a lot for sharing your views. 

Dear Saurabh Ji

                        Thanks for your couraging msg. I know age doesn't matter in the way to fight for real independence. I also know the future of India is in hand of the young people. I always admire the person who stand for our country e.g. Bhagat Singh, Bapu, Neta Ji, Azad ji, but they are not in earth now. So on behalf of the young people of india I Nitish Kumar Pandey appeal the great people like you to come forward and guide us so that we can live our dreams & serve india.

 

Nitish

aakhir isme galat kya hai? yah to sabke liye hoga. fir unki kyo ............... rahi hai|

kyongi lokpal aa gaya to inki hekdi nikal jayegi ashish bhai

ye log sochte hai ki agar ham dhanwaan honge to hi desh dhanwaan hoga. baat sahi hai, lekin jab desh ko hi lootkar dhanwaan honge to fir ban gaya| gart ke alawa aur kaha jaayega desh.

गुरु जी,

एक अत्यंत सार्थक और महत्वपूर्ण चर्चा का धरातल तैयार करने के लिए सादर आभार....

श्री अन्ना हजारे का आवाहन निश्चित रूप से हम सब के भ्रष्टाचार मुक्त, उन्नत भारत के ख़्वाबों को साकार करने की दिशा में एक नयी आधारशीला रखती हुई प्रतीत होती है...

लेकिन धन और सत्ता लोलुप कुटिल शख्सियतें इस आधारशीला पर भवन निर्माण की अनुमति अपनी शर्तों पर देना चाहती हैं... पांच मंजिल से ज्यादा नहीं  बनाना.... अनाधिकृत निर्माण नहीं करना.... सारा निर्माणकार्य पर्यवेक्षक की निगरानी में करना... इतनी जगह छोड़ना... दिवार की मोटाई इससे ज्यादा नहीं रखना.... क्योंकि  उन्हें बस यही आता है... "अड़ंगे लगाना" और गुरु भाई उनका अडंगा लगाना जायज भी तो है क्या? आखिर कुछ अरब भूखे नंगे लोगों की पेट भरने के लिए वे अपने पेट पर लात कैसे बर्दाश्त कर लेंगे...? सो बचाव के लिए वे सारे जायज और नाजायज हथकंडे अपना रहे हैं.

और दूसरी बात जैसा युवा भाई नितीश ने इंगित भी किया है कि हम सब को अपने भीतर सत्य का दीप जलाने की आवश्यकता है ताकि हमारी आत्मा और हमारी राहें प्रकाशित हो.... हकीकत यही है कि आज हिन्दुस्तान ने, कारण चाहे मजबूरी हो चाहे स्वेच्छा, पर भ्रष्टाचार को शिष्टाचार के रूप में स्वीकार कर लिया है... सिद्धान्तः हर व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ है फिर भी हर व्यक्ति की राय होती है कि हम क्या कर सकते हैं? अरे, अगर हिन्दुस्तान के १२५ करोड़ लोग एक साथ अपने स्थान पर खड़े होकर इमानदारी से चिल्लाना भी शुरू कर दे तो अंधी/बहरी सरकार की आँखें देखने और कान सुनने लगेंगे... इसलिए हम सब के लिए आवश्यक है कि हम श्री अन्ना के 'बिल' और अपने सच्चे 'दिल' का समर्थन करें... क्योंकि जब तक 'बिल' और 'दिल' में साम्य नहीं होगा कोई बिल भ्रष्टाचार को कम नहीं कर सकता....

सादर आभार...

संजय जी आपकी बात सही हैं तो क्यों न हम आज से ही और OBO के द्वारा अन्ना हजारे जी के कदम से कदम मिलाएं

वन्दे मातरम बंधुओं,
नेट ने मिश्र में एक नई क्रांति पैदा कर दी..... पूरी की पूरी सरकार बदल गई ......बड़ी ताकत है सोसल वेब साइट्स में.... हम सबको भी एक नई सोच के साथ लोकपाल के समर्थन में आगे आना ही होगा ......... मैं आपमें से किसी एक भाई की कही बात से पूर्णतया सहमत हूँ की हम सुधरेंगे जग सुधरेगा ....... सबसे पहले हमे अपना सुधार करना ही होगा.........

हम आज से ही और OBO के द्वारा अन्ना हजारे जी के कदम से कदम मिलाएं

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service