For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बबुआ बम्बई में बंगला बनवले बा,
बाबू माई के अपना बइलवले बा ।

टिप टाप बनके रहे दुनों रे परानी,
नया युग आइल मरल अखियां के पानी,
बबुआ दुधवो में दागी अब लगवले बा ।
बाबू माई के अपना बइलवले बा ।

सोरि आपन कटि गईल, भूलल मरियादा, 

चार पोथी पढ़ क बूझे अकलमंद जियादा,
बबुआ गेट प नाव माई क लिखवले बा,
बाबू माई के अपना बइलवले बा |

भूल गईल गाँव, बिसर गईल बोली,
देवाली, दसहरा, छठ अउरी होली,
बबुआ दारु संगे बइठकी लगवले बा,
बाबू माई के अपना बइलवले बा ।

जोरु उनुकर पहिरे जाने कइसन कपड़ा,
ना जाने साड़ी कुरती चुनरी भा घघरा,
बबुआ माथे प मेहर बइठवले बा,
बाबू माई के अपना बइलवले बा ।

(मौलिक व अप्रकाशित)
बइलाना = भगाना, सोरि=जड़, मरियादा=मर्यादा, मेहर=पत्नी

Views: 2259

Replies to This Discussion

अह्हाहा.. !!

आजके बबुआ लोगन के निकहा फोटो बनावत आ सोझा देखावत एह रचना खातिर बहुत्ते बधाई, गनेस भाई..  कतना जाना के ई रचना छन् दे लागी.. :-)))
बहुत सुन्दर

नमन आ. बागी साहेब...अब का कहल जाए...इतना बन्हिया ...सुनर सरस रचना...पढ़ी के मन गदगद हो गईल .........

.......कटाक्ष के कटाक्ष....रचना के रचना..........

भूल गईल गाँव, बिसर गईल बोली,
देवाली, दसहरा, छठ अउरी होली,
बबुआ दारु संगे बइठकी लगवले बा,
बाबू माई के अपना बइलवले बा ।..............बहुत बन्हिया...नमन 

भूल गईल गाँव, बिसर गईल बोली,
देवाली, दसहरा, छठ अउरी होली,
बबुआ दारु संगे बइठकी लगवले बा,
बाबू माई के अपना बइलवले बा ।......बहुते नीक लागल पढ़ि के | छठ महापर्व के बहुत बहुत बधाई रउआ के आ० बागी जी | सादर 

बागी जी के सामयिक कविता के पढिके मन गदगद हो गइल उ एतना मन के छूवलस की का कहीं। ओकरा के पढि के आज के समय में नवजवानन के मन के पूरा खुलासा हो जाता अउर यदि एकरा से कवनो बदलाव आवे त धनि भाग।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
10 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
10 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
21 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service