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rakesh gupta's Discussions (506)

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सदस्य टीम प्रबंधन

"है सबको  पता आग-पानी  में अंतर मिलन से ही इनके है होती मुहब्बत..... ........शानदार..…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

सदस्य टीम प्रबंधन

"मुसीबत के कितने पहाड़ इस पे टूटे  न ज़ुल्म-ओ-सितम से है हारी मुहब्बत । हैं सब तुझ पे श…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

सदस्य टीम प्रबंधन

"इसी दम पे गम को सहे जा रहे हैं की होगी कभी तो हमारी मुहब्बत |3| वो लैला वो मजनू वो फ…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

सदस्य टीम प्रबंधन

"लिखा दूसरों का जो पढ़ते हैं भाषण वही लिख रहे हैं गरीबों की किस्मत ।४। न ही कौम पर दो…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

सदस्य टीम प्रबंधन

"गुलों से भी नाज़ुक है इसकी नज़ाकत|है पत्थर से भी सख़्त इसकी अदावत|७| इसे जिस से भी ह…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

सदस्य टीम प्रबंधन

"आदरणीय प्रभाकर जी, पहली कोशिश मे आपको चन्द पँकतियाँ ठीक लगी मेरी हौस्ला अफजाई के लिए…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

सदस्य टीम प्रबंधन

"वन्दे मातरम आदरणीय गुनीजनो, यूँ स्वतंत्र रूप में शेर या गजल लिखना अलग बात है और किसी…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

सदस्य टीम प्रबंधन

"वन्दे मातरम दोस्तों, खुदा की है ये दस्तकारी मुहब्बत, जमाने में सबसे है प्यारी मुहब्…"

rakesh gupta replied Dec 15, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-6(closed now)

556 Dec 17, 2010
Reply by Veerendra Jain

"वन्दे मातरम आदरणीय नवीन जी, गजल के बारे में आपकी ये चर्चा मुझ जैसे अनभिग्य लोगों को…"

rakesh gupta replied Dec 13, 2010 to तरही मुशायरा / इवेंट्स से जुड़े प्रश्नोत्तर

91 Feb 23, 2011
Reply by वीनस केसरी

प्रधान संपादक

"वन्दे मातरम बंधुओं, ये बेहद महत्व पूर्ण है की इस आयोजन में दर्जन भर नये रचनाकारों ने…"

rakesh gupta replied Dec 9, 2010 to "OBO महा इवेंट" अंक-२ (रपट)

15 Dec 12, 2010
Reply by Navin C. Chaturvedi

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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
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आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
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Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
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"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
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दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
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रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
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रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
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Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

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