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इमरान खान's Discussions (790)

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"//छम-छम बरखा भी, बरसे आंगन मोर ,बिरह के लोर मोर, कजरा बहाय है |//गणेश जी, अतुलनीय और…"

इमरान खान replied Jul 10, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
Reply by Admin

"//आग लगे उनके दफ्तर को, ताकि वो घर लौट सके// इस लाइन ने तो जैसे दिल के तारों को छू ल…"

इमरान खान replied Jul 10, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
Reply by Admin

"लाख कोशिशों के बावजूद कुछ खुशगवार नहीं लिख पाया, ख़ुशी के मौके पर मेरी तहरीर ए ग़मज़…"

इमरान खान replied Jul 10, 2011 to "OBO लाइव महा उत्सव" अंक ९

1024 Jul 11, 2011
Reply by Admin

मुख्य प्रबंधक

"ऑफ लाइन phonetic style में हिंदी लिखने के लिए यह तरीका भी इस्तेमाल किया जा सकता है,…"

इमरान खान replied Jun 30, 2011 to देवनागरी (हिंदी) लिपि टंकण के लिये एक बेहतरीन टूल

44 Jan 25, 2015
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"रवि कुमार जी! आपकी email id पर मैं भी अपना एक गीत भेज रहा हूँ....देख लीजियेगा .. शुक…"

इमरान खान replied Jun 30, 2011 to फिल्म दलदल हेतु गीत चाहिए...

48 Jul 23, 2011
Reply by Saurabh Pandey

प्रधान संपादक

"राजेंद्र जी, मेरी तवील तुकबंदी से दो अशआर पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, जब मु…"

इमरान खान replied Jun 29, 2011 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-१२ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें

24 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"आपका हार्दिक अभिनन्दन है शान्नो जी! मेरी गजलें आपको पसंद आयीं आपका बहुत बहुत शुक्रिय…"

इमरान खान replied Jun 29, 2011 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-१२ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें

24 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"मोहतरमा शन्नो साहिबा, 'कोई हंगामा सही, रात जगाई जाये' शायर हंगामा करके 'रात' को जगान…"

इमरान खान replied Jun 29, 2011 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-१२ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें

24 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आप सही कह रहे हैं इस एरिया में मुझे मशक्कत की जरूरत है"

इमरान खान replied Jun 27, 2011 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-१२( Now Closed )

714 Jun 28, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

"शुक्रिया"

इमरान खान replied Jun 27, 2011 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-१२( Now Closed )

714 Jun 28, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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