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आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

सादर अभिवादन ।

पिछले 105 कामयाब आयोजनों में रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर बड़े जोशोखरोश के साथ बढ़-चढ़ कर कलम आज़माई की है. जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी सिलसिले की अगली कड़ी में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-106

विषय - "खुशियों का मौसम"

आयोजन की अवधि- 09 अगस्त 2019, दिन शुक्रवार से 10 अगस्त 2019, दिन शनिवार की समाप्ति तक

(यानि, आयोजन की कुल अवधि दो दिन)

बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
नज़्म
हाइकू
सॉनेट
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.

रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

(फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 09 अगस्त 2019, दिन शुक्रवार लगते ही खोल दिया जायेगा)

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महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
मिथिलेश वामनकर
(सदस्य कार्यकारिणी टीम)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम.


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Replies to This Discussion

आदाब। वाह! मस्त क़ुदरती नज़ारों से रूबरू कराती बेहतरीन शब्द-मणिकाओं से सजी रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया सुनंदा झा साहिबा।

दिल से शुक्रिया आदरणीय मेरी हौसलाफजाई के लिए सादर।

नये कश्मीर के नाम

________________

धरती की जन्नत के दर पर

खुशियों की रुत फिर आयेगी

अब तक सहमी सी रहती थी

हवा ही कुछ ऐसी बहती थी

दहशतगर्दों की मनमानी

पत्थर दिल पर रख सहती थी

सूखे मुख पर फिर से उसके

यौवन की लाली छायेगी

बंदूकी फरमान भुलाकर

अमन चैन को गले लगाकर

फिर से इठलायेगी अब वो

बिछुड़ों को वापस घर लाकर

भूला बिसरा गीत प्रीत का

निडर कंठ से फिर गायेगी

अब पत्थर की बातें छोड़ो

मंसूबे दुश्मन के तोड़ो

लंबी थी वो रात जो बीती

नई किरण से नाता जोड़ो

निकल बेड़ियों से कुहरे की

धूप यहाँ फिर खिल जायेगी

मौलिक व अप्रकाशित

मुहतरमा प्रतिभा पाण्डेय जी आदाब,प्रदत्त विषय को सार्थक करती अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी

बंदूकी फरमान भुलाकर

अमन चैन को गले लगाकर

फिर से इठलायेगी अब वो

बिछुड़ों को वापस घर लाकर

भूला बिसरा गीत प्रीत का

निडर कंठ से फिर गायेगी

वाहहह ! आदरणीया बहुत ही प्यारे भाव उकेरे हैं आपने शब्दों के माध्यम से ।बहुत बहुत बधाई स्वीकारें सादर ।

हार्दिक आभार आदरणीया सुनन्दा जी

आ. प्रतिभा बहन, प्रदत्त विषय पर सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई 

आदाब।.जश्न मनाती, सुन्दर सपने सँजोती आशावादी सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया प्रतिभा जोशी पाण्डेय साहिबा।

हार्दिक आभार आदरणीय शहज़ाद जी

मौसम अनजाना (अतुकान्त) :

अनुच्छेद तीन सौ सत्तर, ... इकहत्तर
आज़ादी के साल बहत्तर
लोकतंत्र और कट्टर
बदतर या बेहतर
क, ख, ग, घ सम
लिखने-पढ़ने, समझने-समझाने
का मौसम
ख़ुशियों का मौसम?

सखेद आम जनता क़ैद
बुद्धीजीवियों में
भारी मतभेद
लोकतंत्र की ओज़ोन परत में छेद
विधि-विधान, संविधान
विवादित अभिलेख
धार्मिक ग्रंथ, स्थल
क़ुरआन, पुराण, वेद
आस्तिकता-नास्तिकता, वैज्ञानिकता
नयी सदी, नया संवेद
उड़ने-उड़ाने, भुनने-भुनाने
का मौसम
ख़ुशियों का मौसम?

धरती के स्वर्ग,
संस्कृति-सभ्यता, सम्पदा, विरासत, परम्परा
सबका व्यापार या बेड़ागर्क
दिवास्वप्न, प्रलोभनों की आड़, बाड़, बाढ़
येन-केन-प्रकारेण धन की बात
प्रांतीय, राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय
मोहित, धरोहित, पुरोहित धनाढ्य-संवर्ग
देशभक्त सम
चुनने-चुनवाने, लुटने-लुटवाने
का मौसम
ख़ुशियों का मौसम?

निर्धन, बेरोज़गार तिरस्कृत
जानकार, ईमानदार बहिष्कृत
तानाशाही निर्णय त्वरित
जनता से अधिकृत?
गढ़े या गड़े मुर्दे उखाड़ कर
अराजकता, साम्प्रदायिकता संचालित
भ्रष्टाचार, अत्याचार प्रकारांतर
दबने-दबाने, शोषण कराने
का मौसम
कितना मनमाना, अनजाना
दुखियों का मौसम !


(मौलिक व अप्रकाशित)

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