For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-123

विषय - "नई सुबह"

आयोजन अवधि- 09 जनवरी 2021, दिन शनिवार से 10 जनवरी 2021, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 09 जनवरी 2021, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम परिवार

Views: 505

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

हार्दिक आभार आदरणीय

आदरणीया प्रतिभा पंडे जी सादर प्रणाम बहुत ही आकर्षक मुक्तक जीवन्त भाव वाह बधाई कुबूल कीजिए

हार्दिक आभार आदरणीय डाॅ छोटेलाल सिंह जी

तीन मुक्तक
(1)
--
गम न कर ये अँधेरा भी मिट जायेगा ऐतबार कर,
आयेगी खुशियों की नई सुबह थोड़ा इंतजार कर,
चांद का चमकना व सूरज का उगना अभी बाकी है,
मिटेंगे गम, महकेगा चमन इस सुबह का सत्कार कर।
--
(2)
--
आस लगाये है खुशियों की कोई नई सुबह लाये,
देख कर जिसे चेहरे पर सभी के बहार आ जाये,
बात समझो यारों मुफ्त में कोई खुशी मिलती नहीं,
कर्म करो ऐसा खुशियों की सुबह खुद ही चली आये।
--
(3)
--
प्यार में तेरे किसे क्या मिला अब तो कुछ विचार करो,
किसने क्या खोया किसने क्या पाया सोच विचार करो,
आह आँसू करवटें या प्रतीक्षा के सिवाय क्या मिला,
नई सुबह खुशियां लाई अब तो सब पर उपकार करो।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
- दयाराम मेठानी

आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन । अच्छे मुक्तक हुए हैं । हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार।

आदरणीय दयाराम मेठानी जी, प्रदत्त विषय पर शानदार मुक्तक सृजन। हार्दिक बधाई। 

आदरणीय प्रतिभा पांडे जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार।

आदरणीय दयाराम मथानी जी सादर अभिवादन एक से बढ़कर एक शानदार मुक्तक पढ़कर मन आह्लादित हुआ सादर बधाई कुबूल कीजिए

आदरणीय  डॉ छोटेलाल सिंह जी,  प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।

नई सुबह

नई सुबह लेकर आयी है, जीवन में खुशहाली
दीपित हो विस्तीर्ण जगत ये, झूम रही हर डाली
अमल-कमल दल सुरभित होते, दिनकर के आने से
हास-हुलास मधुप सब करते, गुन- गुन-गुन गाने से

अवनि और अम्बर चहुँ दिशि में, अमंद किरणें छायीं
नव पराग नित भरकर कलियाँ, रस छलकाने आयीं
नभ में यत्र-तत्र घन-शावक, शोभित अरुणाई से
चमक उठे भगवान भास्कर, अपनी तरुणाई से

खग-मृग मीठे बोल सुनाकर, जीवन को हर्षाते
नव किसलय उत्फुल्ल प्रभा से, मधुमय जगत बनाते
नव्य-मधुर-मनमोहक बेला, मन उल्लास जगाती
अपनापन ले नई सुबह नित, सबको राह दिखाती

नहीं अकिंचनता लक्षित हो, जीवन के कोने में
हिमजल हास नहीं खो देना, हरपल ही सोने में
नयी उमंगें नयी तरंगे, दिल में सदा जगाओ
निखिल विश्व मंगलमय होवे, नई चेतना लाओ

मौलिक एवं अप्रकाशित

नयी उमंगें नयी तरंगे, दिल में सदा जगाओ
निखिल विश्व मंगलमय होवे, नई चेतना लाओ.............अति सुंदर सृजन के लिए आदरणीय  डॉ छोटेलाल सिंह जी हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"जनाब जान गोरखपुरी साहिब आदाब, टिप्पणी पर आपकी प्रतिक्रिया देर से देख पाया हूँ, बहरहाल आपकी कुछेक…"
5 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post "कोई क्यों रहे "
"सादर प्रणाम गुरु जी कोशिश करके देखता हूँ कथ्य और रब्त स्पष्ट करने का फ़िर से एडिट करके"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । मतले के दोनों मिसरों में…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Aazi Tamaam's blog post "कोई क्यों रहे "
"जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, अव्वल तो ग़ज़ल की बह्र प्रचलित नहीं, कथ्य भी नहीं, मिसरों में रब्त भी नहीं,…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जग मिटा कर दुख सुनाने- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-क्या करे कोई

221 2121 1221 2121हमसे शगुफ़्तगी की तमन्ना करे कोई अब और दर्द देने न आया करे कोई2आकर क़रीब इश्क़…See More
9 hours ago
Rachna Bhatia commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"आदरणीय कृष मिश्रा जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें।मतला शानदार है।"
9 hours ago
Rachna Bhatia commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रातें तमस भरी हैं उलझन भरे दिवस हैं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' भाई ,नमस्कार। भाई अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई। भाई, आँगनों पर…"
9 hours ago
Rachna Bhatia commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: खिड़की पे माहताब बैठा है।
"आदरणीय कृष मिश्रा जी नमस्कार। बेहतरीन ग़ज़ल हुई वाह वाह वाह।"
9 hours ago
Samar kabeer commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: खिड़की पे माहताब बैठा है।
"जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । नाब जान गोरखपुरी जी आदाब,…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रातें तमस भरी हैं उलझन भरे दिवस हैं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार .."
10 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी : वृद्ध
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे,बधाई स्वीकार करें । 'चुटकी भर सम्मान को, तरस गए हैं…"
10 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service