For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

सादर अभिवादन ।

पिछले 95 कामयाब आयोजनों में रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर बड़े जोशोखरोश के साथ बढ़-चढ़ कर कलम आज़माई की है. जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी सिलसिले की अगली कड़ी में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-96

विषय - "विरासत"

आयोजन की अवधि- 12 अक्टूबर 2018, दिन शुक्रवार से 13 अक्टूबर 2018, दिन शनिवार की समाप्ति तक

(यानि, आयोजन की कुल अवधि दो दिन)

बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
नज़्म
हाइकू
सॉनेट
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.

रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

(फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 12 अक्टूबर' 2018, दिन शुक्रवार लगते ही खोल दिया जायेगा)

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
मिथिलेश वामनकर
(सदस्य कार्यकारिणी टीम)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम.

Views: 928

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

मुक्त छंद : विरासत

मेरी माँ ने मुझे अपना सब हुनर दे दिया।

उनमें भी सबसे ज्यादा;
 अपनी पाककला का गुर दे दिया।
यूँ तो हर माँ गुणों की खान होती है।
पर किसी एक गुण से;
 इंसान की अपनी पहचान होती है।
मेरी माँ की हर बात में कुछ ऐसा जादू था।
जिससे लगता था;
 इस जहां के हर जर्रे पे बस मेरा ही काबू था।
मुझे छोड़ के वो इस जहां से चली गई है।
पता ही नहीं चलता;
 क्या देके और क्या लेके वो गई है।
विरासत में मिले गुण मैं अपनी बेटी को सिखा रही हूँ।
मेरी माँ की दिखाई हुई राह;
 अब मैं उसका दिखा रही हूँ।
जब माँ बुलाती, न जाने के मैं नित नए बहाने बनाती।
आज मैं जाने को तैयार हूँ; 
 पर कहीं से भी उसकी आवाज नहीं आती।
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

आदरणीया अनीता जी आदाब,

                                 बहुत ही बेहतरीन रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

 सम्मानित लेखक श्री मोहम्मद आरिफ जी, रचना की सराहना हेतु आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ।

अनिता जी,

बहुत अच्छी रचना।

मां-पुत्री के बीच संस्कारों के हस्तांतरण का अच्छा विवरण

सम्मानित लेखक श्री अजय गुप्ता जी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

आदरणीया  अनिताजी

पूरी सच्चाई के साथ अपनी बात कह दी। यही प्रायः हर बेटी और हर परिवार की कहानी है। बेटे भी बाद में पछताते हैं माँ के साथ किए अप्ने व्यवहार पर । सुंदर संक्षिप्त और भावपूर्ण इस प्रथम प्रस्तुति के लिए हृदय से बधाई।

सम्मानित लेखक श्री अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

आदरणीया अनीता जी विषयानुकूल बहुत बेहतरीन रचना बधाई कुबूल कीजिए

सम्मानित लेखक डॉ छोटेलाल सिंह जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

बेहतरीन रचना के माध्यम से माँ बेटी के रिश्ते को बताती रचना।हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीया अनीता दी.

आदरणीया अनीता शर्मा जी, प्रदत्त विषय पर माँ  का बहुत ही सजीव चित्रण किया है आपने।  बहुत बहुत बधाई। 

मुहतरमा अनीता शर्मा जी आदाब,प्रदत्त विषय को सार्थक करती अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  PHOOL SINGH जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  Samar kabeerजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"आदरणीय  राज़ नवादवीजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं जीवन पर :
"आदरणीय फूल सिंह जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पागल मन ..... (400 वीं कृति )
"आदरणीय  PHOOL SINGHजी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का आभारी है।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , प्रस्तुति को आत्मीय मान देने एवं सुधारात्मक सुझाव देने का दिल से…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय  narendrasinh chauhanजी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आदरणीय फूल सिंह जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post देर तक ....
"आदरणीय narendrasinh chauhanजी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service