For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तरही मिसरा
'हाफिज़ नासिर' की मशहूर ग़ज़ल का इक मिसरा
"तूने क्या मुझको मुहब्बत में बना रक्खा है "
वज्न- २१२२११२२११२२२२
काफिया- आ की मात्रा
रद्दीफ़- रक्खा है
तो आ जाइये मुशायरे की रौनक बढ़ाने के लिए अपनी ग़ज़लों के साथ, ग़ज़ल नहीं तो कम से कम एक दो शेर ही सही|

Views: 1916

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

मै सोचा ना था एक दी आप सब मिलोगे ,
मेरी किस्मत सभी को दोस्त बना रखा हैं
waah, mujhe to padhne me hi bhut maza aa raha hai
वाह वाह, आपकी ग़ज़ल तो जान डाल दी इस तरही मुशायरा मे, बहुत खूब आज़र साहब, जबरदस्त ग़ज़ल कही है आपने,

पिछले सप्ताह मेरे बड़े भाई श्री नवीन चतुर्वेदी जी की पहल पर प्रायोगिक तौर पर शुरू किये गए तरही मुशायरे का आज समापन किया जा रहा है| कई शायरों ने इस मुशायरे में बढचढ कर हिस्सा लिया तो कईयों ने एक्के दुक्के शे'र ही चलाये| 

कई सदस्यों की ज़ोरदार मांग है कि ऐसे आयोजन हर सप्ताह किये जाएं| अतः इस मांग को मद्देनज़र रखते हुए अगले सप्ताह के तरही मिसरे की घोषणा कल अर्थात गुरुवार को की जाएगी और मुशायरे की शुरुवात शनिवार सुबह से की जाएगी|

(आदरणीय संजीव सलिल जी द्वारा "तरही मुशायरा" के लिये भेजी गई ग़ज़ल जो मैं हुबहू यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ)
"तूने क्या मुझको मुहब्बत में बना रक्खा है "
वज्न- २१२२११२२११२२२२ = २३
काफिया- आ की मात्रा
रद्दीफ़- रक्खा है

हास्य मुक्तिका

संजीव 'सलिल'

आत्मीय!
वन्दे मातरम.
मैं गजल तो कहता नहीं, मुक्तिका की कोशिश है. यदि आपके पैमाने पर ठीक हो तो ही दें अन्यथा छोड़ दें.

हास्य मुक्तिका

संजीव 'सलिल'

मेरे दिल ने तो तुझे रब्बा बना रक्खा है.
तूने मेकप का मुझे डब्बा बना रक्खा है..

मैं तो दीवाना हूँ तेरा तहे-दिल से जानम.
तूने पर्दा किया, क्या बब्बा बना रक्खा है..

मैंने दामन को जो थामा तो झटकती क्यों हो?
मैं तो नेता नहीं, जो धब्बा बना रक्खा है..

गले मिलती हो अकेले में, कोई आये तो.
दूर हो जाती हो क्या अब्बा बना रक्खा है..

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service