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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions (2,690)

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सदस्य टीम प्रबंधन

"इस गीत संग्रह की इससे अच्छी समीक्षा नहीं हो सकती। हृदय से बधाई स्वीकार करें आदरणीय स…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Feb 23, 2016 to भावना तिवारी के पास अंतर्मन को खँगालने की नैसर्गिक क्षमता है

4 Feb 24, 2016
Reply by Saurabh Pandey

"हा, हा, हा। आदरणीय सौरभ जी, उन्होंने कोई समीक्षा नहीं लिखी केवल समीक्षा के बारे में…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Aug 20, 2015 to एक कवि की दृष्टि से – अकुलाहटें मेरे मन की (महिमा श्री)

10 Aug 20, 2015
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

"शुक्रिया आदरणीय गौरव जी"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Aug 19, 2015 to एक कवि की दृष्टि से – अकुलाहटें मेरे मन की (महिमा श्री)

10 Aug 20, 2015
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

"शुक्रिया आदरणीय मिथिलेश जी"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Aug 19, 2015 to एक कवि की दृष्टि से – अकुलाहटें मेरे मन की (महिमा श्री)

10 Aug 20, 2015
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

"शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Aug 19, 2015 to एक कवि की दृष्टि से – अकुलाहटें मेरे मन की (महिमा श्री)

10 Aug 20, 2015
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

"शुक्रिया  महिमा जी। मैं वादा करता हूँ तो निभाने की पूरी कोशिश करता हूँ। वैसे किसी अच…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Aug 19, 2015 to एक कवि की दृष्टि से – अकुलाहटें मेरे मन की (महिमा श्री)

10 Aug 20, 2015
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

"बहुत बहुत धन्यवाद सौरभ जी, स्नेह बना रहे"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Apr 7, 2014 to पुस्तक समीक्षा ग़ज़लकार ज़हीर कुरेशी जी द्वारा ग़ज़ल कहनी पड़ेगी झुग्गियों पर (‘सज्जन’ धर्मेन्द्र)

2 Apr 7, 2014
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

सदस्य टीम प्रबंधन

"बड़ी बेबाकी से लिखी गई ईमानदार समीक्षा है। ग़ज़लकार और समीक्षाकार दोनों को बहुत बहुत बध…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Feb 20, 2014 to डाली मोगरे की : समीक्षा // --सौरभ

2 Feb 20, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"इस शानदार काव्यात्मक समीक्षा के लिए आदित्य जी का तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ। किसी पु…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 24, 2013 to ''परों को खोलते हुए'' की काव्यात्मक समीक्षा....................आदित्य चतुर्वेदी........समीक्षक

11 Nov 24, 2013
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

"राहुल देव जी का तह-ए-दिल से आभारी हूँ कि उन्होंने इतनी विस्तृत पाठकीय प्रतिक्रिया लि…"

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied Nov 24, 2013 to समीक्षा - परों को खोलते हुए-1 : एक पाठकीय प्रतिक्रिया -राहुल देव

14 Nov 24, 2013
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

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काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
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हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
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दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11

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