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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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गुरु जी के मान बतिया जीवन बदल जाई,

गुरु जी के मान बतिया जीवन बदल जाई, आज नाही बाबु दू चार साल बादे बुझाई , खायल रोज गुटका तुहू बाबु मन लगाइके , साझ ले तिस चालीस रूपया बिलवाइ…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Oct 12, 2010
Reply by Rajesh Kumar Singh

माता पूजे सांवरी सजनिया ( नवरात पर)

माता पूजे सांवरी सजनिया ( नवरात पर) रुन्नू झुन्नू बाजे पैजनिया - माता पूजे सांवरी सजनिया. रहिला ( चना ) के दाल भरल पुड़िया पकवली. गु ड़ के…

Started by satish mapatpuri

2 Oct 11, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

बबुआ हो तनी घूम जाईता ,

बबुआ हो तनी घूम जाईता , फोनवा पे का हम सुनाई , खपरा फूटल छान के बाटे , सोच कईसे हम बनवाई , चार साल से तू ना आईला , बहुआ के लेके जबे तू गईला…

Started by Rash Bihari Ravi

8 Oct 7, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

कैसे बुझी गरीबन के गुरु पेट के आग ,

देखि मचल बाटे इहा भागमभाग , केहू उरावत बा बिना बतलब के , केहू मतलब खातिर खोजत बा , केहू के हिस्सा में कुछुओ नाइखे , केहू मरत बा बुझावे खाति…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Oct 6, 2010
Reply by Neelam Upadhyaya

काहे ना इ राउआ बुझात बा ,

हमनी के खाएके नइखे मिळत , अब जिआल मिस्किल हो रहल बा , बाह रे हिंद के शासक , हम खाइला बिना मरत बनी , तोहार आनाज सड़त बा , सडा के तू मांगवइबा…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Sep 21, 2010
Reply by Neelam Upadhyaya

दुश्मन देले पनाह करम हमारा हिंद के फूटल ,

दिल्ली में गोली चलाल संगे में बम फूटल , मेल आईल बी बी सी हिंदी में सिमी से , नेता बाडनसन हिजरा देश के करम फूटल , उनकर काम न हवे बोलत बाडन द…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Sep 21, 2010
Reply by Neelam Upadhyaya

ना रोये देबेलन ना हसही देबेलन ,

ना रोये देबेलन , ना हसही देबेलन , मन के माफिक इ , ना चले देबेलन , कलह तक रहे मन में , देश के खातिर जिआब , चल देनी सीना ठोकी , देश के सेवा क…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Sep 21, 2010
Reply by Neelam Upadhyaya

जानी ले की तुहू कमइबा जाई प्रदेश ,

जानी ले की तुहू कमइबा जाई प्रदेश , हम कईसे जिआब बलमुआ धरी जोगनी के भेस , बालम तू मति जा तू मति जा तू मति जा प्रदेश , मई बाप के छोर के आईनी…

Started by Rash Bihari Ravi

6 Sep 20, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

desh bhakti geet

देशवा के खातिर बीर जहवां दे देले परनवा, हिन्दुस्तनवा हमारे बा......................, जाने जेके दुनिया महनवा, हिन्दुस्तनवा हमारे बा.........…

Started by आशीष यादव

18 Sep 17, 2010
Reply by आशीष यादव

भाई हो हम आ गईनी ,

गरीबन से करेलन प्यार , हाउअन यारान के यार , इनके देखते भागे बवाल , भाई हो देखा आ गईले , इ आपन भूचाल , सुख आउर समब्रिधि चारू ओर , भाई चारा…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Sep 16, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

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दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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