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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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नोकरानी मति रखिहs,

भाई तोहर नाम बा, नोकरानी मति रखिह , नोकरानी रखिह, त घरनी मत छोरिहा , भाई तोहर नाम बा, नोकरानी मति रखिह , आगे पीछे ओकर इतिहास पाहिले देखिह ,…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Sep 14, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

Meri Rachna Bhojpuri main

Started by Subodh kumar

5 Sep 14, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

कहना मान

दूर-दूर तक ले जंगल के विस्तार रहे । जहाँ तक ले नजर परे हरियालिये हरियाली लउकत रहे । एकरे बीच में अपना हरिणी माई के गर्भ से ऊ सु्न्दर छौना ज…

Started by Neelam Upadhyaya

5 Sep 9, 2010
Reply by आशीष यादव

ई भोजपुरी के 'उत्थान' बा की 'पतन'

आज सब जानत बा की भोजपुरी कवन तरह से फईलत बा| . आज जहाँ कुछ लोग भोजपुरी के उठान में आपन जी-जान लगा दिहलें बाटे उहवे कुछ 'करता'-'धर्ता' लोग ए…

Started by आशीष यादव

5 Sep 4, 2010
Reply by sandeep kumaar kushwaha

का आइसन अपराध के छमा कईल जा सकेला रुआ लोग आपान बिचार दी ,

आज सुबेरे सुबेरे हमरा लगे दिलीप गिरी जी के फोने आइल हा जे महुआ के बिउरो चीफ बानी कोलकता में उहा के सवाल रहुये की भोजपुरी के नाम पर इ का होत…

Started by Rash Bihari Ravi

7 Sep 3, 2010
Reply by pankaj jha

बाबूजी रहती ता का कहती , (ek purana kavita)

बाबूजी रहती ता का कहती , इ सवाल हमारा मन में बार बार आवत बा , बात ओ बेर के हा जब हम पढ़त रहनी , स्कुल छोर के खुबे सिनेमा देखत रहनी , केहू क…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Sep 2, 2010
Reply by Shakur Khan

उ जमाना इयाद बा तोहर बन ठन के आइल इयाद बा ,

उ जमाना इयाद बा तोहर बन ठन के आइल इयाद बा , ना कटत रहे समय हमरा बिन इ तोहर कहल इयाद बा , साझ के मिलल हो जात रहे रात अइसही बातो में , ना ला…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Sep 1, 2010
Reply by Deepak Sharma Kuluvi

"उ प्यार कहाँ से ले आई"

उ प्यार कहाँ से ले आई , जे से तोहके आपन बनाई उ बंधन कहाँ से ले आई , जे से तोहके बाँध पाई उ सपना कहाँ से ले आई, जे मे तोहार दरश पाई उ दुन…

Started by Raju

2 Sep 1, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

तिकड़ी का बदला

सुरी कुआं भीरी खड़ा बा ...केहू के आवे के इंतज़ार हो रहल बा ..हेने होने लगातार देख रहल बा ...निचे देखलस इनार में ,सुखाल इनार जौना में बहारण…

Started by ritesh singh

5 Aug 31, 2010
Reply by Rash Bihari Ravi

लाल कहा से दीही फाट गइल गुदरी ,

केतनो सुधाराबा भाई इ नाही सुधरी , लाल कहा से दीही फाट गइल गुदरी , उहे गाव ह एकर बा उहे संसकीरती , ना जाने कब कईसे बदलल पर्वीरती, जहा चालत र…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Aug 30, 2010
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

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