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AJAY KANT
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I am ver down to earth person.......have been spending some time reading / writing in hindi and want to contribute to hindi sahitya.

AJAY KANT's Blog

पापा मम्मी आप भी आओ

पापा मम्मी आप भी आओ



उन पुरानी गलिओं से फिर

ख्याल अपने दिल तक आये

आँगन में थे खिलते उन कलियों से

सवाल अपने दिल तक आये

दौरते आते सारे किस्से

कोई बैठकर मुझे सुनाओ

आँखे तरस रही दर्शन को

पापा मम्मी आप भी आओ





गहरी जाती उन घाटीयों से

संकराति गूंजे घूम रही हैं

चट्टानों पे रेत की बूंदे

अब भी मानो झूम रही हैं

भूलते जाते उन पन्नो से

पुरानी कुछ गजलें सुनाओ …

Continue

Posted on November 3, 2012 at 12:27pm — 3 Comments

जब भी जिंदगी को सोचता हूँ

भंगुरता सी प्रतीत हो रही

जब भी जिंदगी को सोचता हूँ

रोज की जद्दोजहद में फंसा मैं

मस्तिष्क पटल को नोचता हूँ

उतार चढ़ाव से उतना नहीं परेशान

लेकिन कुछ छूट रहा सा लग रहा है

डग लम्बे भर रहा लेकिन

मंजिल और दूर सी लग रही है

बहुत हिम्मत करके कभी कभी

आँगन में नए पौधे लगाता हूँ

बिखरे हुए सपनो को सामने करके

नयी दिशा को पग बढ़ाता हूँ

लेकिन परिवार और समाज में बंधा

मुल्ला की…

Continue

Posted on June 5, 2012 at 5:30pm — 4 Comments

सुन रहा रात की धमनी शिराओं से

बन गया मुसाफिर इस दुनिया में

सुख दुःख की लाँघ सीमाओं को

सुबह से चलता चलता अब

सुन रहा रात की धमनी शिराओं से

 

कोई पुकारता है दूर चट्टानों से

कोई ढूंढ़ता है मुझे मेरे बहानो से

उन झुरमुटों को साथ ले चला आया

मैं अब किस दिशा को बढ़ चला हूँ

कंधे पर भार लगते नहीं हैं

कोई पूछे सवाल कहारों से

सुबह से चलता चलता अब

सुन रहा रात की धमनी शिराओं से

रोक कर कई पूंछते हैं 

शहर  किधर को…

Continue

Posted on February 4, 2012 at 8:07pm

एक बार और

एक बार और



एक बार और जीने की ख्वाहिश हुई

और उमंगे सातवें आसमान छूने को है

एक बार और मन के बीज अंकुरित हुए

और दिल की सरहदें खुलने को है



असंभव कुछ पहले भी नही था

लेकिन इंद्रियां जुड़ नही रही थी

मन… Continue

Posted on May 25, 2011 at 2:00pm — 1 Comment

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