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Dr. Anju Lata Singh
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Dr. Anju Lata Singh's blog post "लक्ष्य तय करो जीवन का "(कविता)
"बहुत ही सुंदर कविता रची है आदरणीया बधाई..."
Sep 28, 2019
केवल प्रसाद 'सत्यम' commented on Dr. Anju Lata Singh's blog post "लक्ष्य तय करो जीवन का "(कविता)
"आ. अंजू लता जी,  आपने कविता को बड़ी ही सरलता से लय बद्ध किया है.  बहुत अच्छा लगा. आपकी कविता पर अच्छी पकड है.  लेकिन कविता समय की अन्विति माँगती है. आप जैसे-जैसे कविता को और अधिक समय देंगी.  कविता स्वयं निखरती जायेगी. जल्दबाजी की…"
Sep 27, 2019
Samar kabeer commented on Dr. Anju Lata Singh's blog post "लक्ष्य तय करो जीवन का "(कविता)
"मुहतरमा डॉ. अंजु लता सिंह जी आदाब,ओबीओ पर पहली बार आपकी कविता पढ़ रहा हूँ । बहुत अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 25, 2019
Dr. Anju Lata Singh posted a blog post

"लक्ष्य तय करो जीवन का "(कविता)

स्वरचित कविता शीर्षक- "लक्ष्य तय करो जीवन का"पंचभूत तन दो दिन कालक्ष्य तय करो जीवन काशैशव में मासूम रहें सबसीखें हैं जीने का ढबधीरे-धीरे तन मुस्काए मन में चुलबुल शोखी आएपथ पर मंथर कदम पड़ेंकरतब करते लघु बड़े गतिमय जीवन निश-दिन कापंचभूत तन दो दिन का लक्ष्य तय करो जीवन कासदाचार का पाठ पढ़ोसुगढ़ प्रेम के तंत्र गढ़ोकरो बड़ों का तुम सम्मान बंधु!देव!मनुज-संतान!छोटों पर वात्सल्य लुटाओखिलखिल करके गले लगाओमात-पिता ईश्वर का रूपकृपा पाओ सर्वत्र अनूपलक्ष्य न भूलो परहित काआनंद बढ़ाओ सद्चित काध्यान करो पावन…See More
Sep 23, 2019
Dr. Anju Lata Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"लघुकथा गोष्ठी क्र.51 स्वरचित एवं मौलिक वसुंधरा की कोख में निरंतर बहने वाला जल विभिन्न रूप धरकर अपने अस्तित्व की रक्षा करने हेतु हमेशा सचेत रहता उसे कुछ गर्व था इस बात का कि वह जीवन के लिये अपरिहार्य बन चुका है .…"
Jun 29, 2019
Dr. Anju Lata Singh is now a member of Open Books Online
Jun 29, 2019

Profile Information

Gender
Female
City State
New Delhi
Native Place
Ghaziabad
Profession
Retired Teacher (Hindi PGT - HOD)
About me
I am a retired Hindi PGT teacher and love to read and write stories, poems, and drama

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"लक्ष्य तय करो जीवन का "(कविता)

स्वरचित कविता

शीर्षक- "लक्ष्य तय करो जीवन का"

पंचभूत तन दो दिन का

लक्ष्य तय करो जीवन का

शैशव में मासूम रहें सब

सीखें हैं जीने का ढब

धीरे-धीरे तन मुस्काए

मन में चुलबुल शोखी आए

पथ पर मंथर कदम पड़ें

करतब करते लघु बड़े

गतिमय जीवन निश-दिन का

पंचभूत तन दो दिन का

लक्ष्य तय करो जीवन का

सदाचार का पाठ पढ़ो

सुगढ़ प्रेम के तंत्र गढ़ो

करो बड़ों का तुम सम्मान

बंधु!देव!मनुज-संतान!

छोटों पर वात्सल्य लुटाओ

खिलखिल करके गले…

Continue

Posted on September 23, 2019 at 6:44pm — 3 Comments

 
 
 

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