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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
  • Male
  • Kota, Rajasthan
  • India
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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s Page

Latest Activity

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"नवगीत दिन पर दिन हो प्रचण्‍ड  हे मार्तण्‍ड ! तुम धरा को न देना घाव गम्‍भीर न ऐसा कोई प्रभाव ही देना। सूरज तुम चलते रहना। । यह धरा सहिष्‍णु है कभी नहीं जतलाएगी कष्‍ट सहेगी हर, दृष्टि कभी न मिलाएगी न लेना अर्थ…"
Oct 14, 2017
Shubhranshu Pandey commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post लिव इन रिलेशनशिप
"सुन्दर विषय को उठाया है. सादर."
Nov 18, 2014

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post लिव इन रिलेशनशिप
"बहुत ही रोचक और सामयिक प्लाट है इस कहानी का...पर शिल्पगत सुझावों के लिए जानकारों के कहे से मेरी भी सहमति है  प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें आ० डॉ० गोपाल कृष्ण भट्ट जी "
Nov 12, 2014
Shyam Narain Verma commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post लिव इन रिलेशनशिप
"बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ... सादर बधाई"
Nov 10, 2014

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post लिव इन रिलेशनशिप
"गंभीर विषय पर अच्छी कलम आज़माई की है, लेकिन इसको लघुकथा हरगिज़ नहीं कहा जा सकता आ० डॉ आकुल जी। थोड़ी सी मेहनत और करें तो अच्छी खासी कहानी अवश्य बन सकती है।"
Nov 10, 2014
somesh kumar commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post लिव इन रिलेशनशिप
"यूँ तो मैं स्वयं ,इस मंच के गुरुओं से लघुकथा सीख रहा हूँ पर हाँ ,आप की कहानी में स्पष्टता की कमी लग रही है ,कोशिश करें ,कहानी पोस्ट करने से पहले उसे 2-3 बार पढ़े और कमी लगने पर सुधार भी करें ,कोशिश और विषय दोनों गम्भीर हैं |कोशिश को…"
Nov 9, 2014
ram shiromani pathak commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post लिव इन रिलेशनशिप
"बात तो सही की आपने आदरणीय//हार्दिक बधाई आपको "
Nov 9, 2014

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post लिव इन रिलेशनशिप
"कहानी उपन्यास शैली में हो गयी है, लघुकथा में मिलने वाली तीक्ष्णता लुप्त है, एक गंभीर विषय पर लेखन हेतु बधाई आदरणीय "अकुल" साहब ."
Nov 9, 2014
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' posted a blog post

लिव इन रिलेशनशिप

रविवार का दिन था। सज्‍जनदासजी के घर पड़ौसी प्रकाश चौधरी आ कर चाय का आनंद ले रहे थे।बातों बातों में प्रकाशजी ने कहा- ‘क्‍या जमाना आ गया, देखिए न अपने पड़ौसी, वे परिमलजी, कोर्ट में रीडर थे, उनके बेटे आशुतोष की पत्‍नी को मरे अभी साल भर ही हुआ है, मैंने सुना है, उसने दूसरी शादी कर ली है। बेटा है, बहू है और एक साल की पोती भी। अट्ठावन साल की उम्र में क्‍या सूझी दुबारा शादी करने की। पत्‍नी नौकरी में थी, इसलिए पेंशन भी मिल रही थी। अब शादी करने से पेंशन बंद हो जाएगी। यह तो अपने पैरों पर कुल्‍हाड़ी मारना…See More
Nov 9, 2014
Aditya Kumar commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post छँट गये अँधेरे
"aapko bhi bahut bahut subhkamnayen"
Oct 22, 2014
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul''s blog post छँट गये अँधेरे
"विश्वांसों के पतझड़ में शिकवा क्या फूलों से तुलसी माला में गुंजा के मनके नहीं पिरोएँ संकल्प लिए हैं जब-जब छँट गये अँधेरे। बुझी हुई आशाओं के नवदीप जलाएँ--------बहुत सुंदर और सार्थक रचना हुई है | हार्दिक बधाई श्री भट्ट साहब | दीपोत्सव की मंगल…"
Oct 22, 2014
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' posted a blog post

छँट गये अँधेरे

दीप जले हैं जब-जबछँट गये अँधेरे।अवसर की चौखट परखुशियाँ सदा मनाएँबुझी हुई आशाओं केनवदीप जलाएँहाथ धरे बैठेढहते हैं स्वर्ण घरौंदेसौरभ के पदचिह्नों परजीवन महकाएँक़दम बढ़े हैं जब-जबछँट गये अँधेरे।कलघोषों के बीचआहुति देते जाएँयज्ञ रहे प्रज्‍ज्‍वलितसिद्ध हों सभी ॠचाएँपथभ्रष्टों की प्रगति केप्रतिमान छलावेकर्मक्षेत्र में जगती रहतींसभी दिशाएँअडिग रहे हैं जब-जबछँट गये अँधेरे।आतिशबाजी से मन केमनुहार जताएँघर-घर देहरी आँगनदीपाधार सजाएँजहाँ अँधेरे भाग्य बुझातेरहते सपनेफुलझड़ियों से गलियों मेंगुलज़ार सजाएँहाथ मिले…See More
Oct 21, 2014
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' added a discussion to the group बाल साहित्य
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स्‍वर आभूषण से सजते हैं हर व्‍यंजन

अ से अनार, आ से आमइ से इमली, ई से ईखऐसे स्‍वर को सीख।उ से उल्‍लू, ऊ से ऊनए से एक ऐ से ऐबशब्‍दों से भर लो तुम जेब। ओ से ओखली औ से औरतअं से अंडा, अ: से बोलो कहो अहा।जोर जोर से खूब लगाओ कहकहा।ये शब्‍दों के हैं आभूषणककहरा इनसे सजते हैंजो बोलोगे वही लिखोगेऐसा विज्ञानी कहते हैं।क से ह तक वर्णमाला कोककहरा कहते हैं समझोआभूषण पहनाओ इनकोफि‍र व्‍यंजन-सुर को समझो। क का कि की कु कू के कैको कौ कं क:।क से ह तक रट डालोकर लोगे शब्‍द फतह।एक बात की गाँठ बाँध लोजो बोलोगे वही लिखोगे।उच्‍चारण भी है वैज्ञानिकतभी…See More
Oct 13, 2014
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' joined Admin's group
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बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |
Oct 13, 2014
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 48 की समस्त संकलित रचनाएँ
"बधाई। "
Oct 12, 2014
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 48
"आदरणीय  प्रणाम। प्रोत्‍साहन के लिए आभार। "
Oct 11, 2014

Profile Information

Gender
Male
City State
Kota Rajasthan
Native Place
Kota
Profession
Writing
About me
writing since 1975, published 4 books on poetry, anecdotes, drama etc.

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लिव इन रिलेशनशिप

रविवार का दिन था। सज्‍जनदासजी के घर पड़ौसी प्रकाश चौधरी आ कर चाय का आनंद ले रहे थे।

बातों बातों में प्रकाशजी ने कहा- ‘क्‍या जमाना आ गया, देखिए न अपने पड़ौसी, वे परिमलजी, कोर्ट में रीडर थे, उनके बेटे आशुतोष की पत्‍नी को मरे अभी साल भर ही हुआ है, मैंने सुना है, उसने दूसरी शादी कर ली है। बेटा है, बहू है और एक साल की पोती भी। अट्ठावन साल की उम्र में क्‍या सूझी दुबारा शादी करने की। पत्‍नी नौकरी में थी, इसलिए पेंशन भी मिल रही थी। अब शादी करने से पेंशन बंद हो जाएगी। यह तो अपने पैरों पर…

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Posted on November 9, 2014 at 9:30am — 7 Comments

छँट गये अँधेरे

दीप जले हैं जब-जब

छँट गये अँधेरे।

अवसर की चौखट पर

खुशियाँ सदा मनाएँ

बुझी हुई आशाओं के

नवदीप जलाएँ

हाथ धरे बैठे

ढहते हैं स्वर्ण घरौंदे

सौरभ के पदचिह्नों पर

जीवन महकाएँ

क़दम बढ़े हैं जब-जब

छँट गये अँधेरे।

कलघोषों के बीच

आहुति देते जाएँ

यज्ञ रहे प्रज्‍ज्‍वलित

सिद्ध हों सभी ॠचाएँ

पथभ्रष्टों की प्रगति के

प्रतिमान छलावे

कर्मक्षेत्र में जगती रहतीं

सभी…

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Posted on October 21, 2014 at 10:47am — 2 Comments

विश्‍वदृष्टि दिवस पर रचना

बचें दृष्टि से दृष्टिदोष फैला हुआ है चहुँ दिश।

निकट या दूर दृष्टि सिंहावलोकन हो चहुँ दिश।

दृष्टि लगे या दृष्टि पड़े जब डिढ्या बने विषैली।

तड़ित सदृश झकझोरे मन जब दृष्टि बने पहेली।

गिद्धदृष्टि से आहत जन-जन वक्र दृष्टि से जनपथ।

जन प्रतिनिधि, सत्‍ताधीशों के कर्म अनीति से लथपथ।

रखें दृष्टिगत हो जन-जाग्रति, जन-निनाद, जन-क्रांति।…

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Posted on October 9, 2014 at 9:16am — 3 Comments

कल

यदि मैं आज हूँ

आज के बाद भी हूँ मैं

तो वह अवश्‍य होगा।

यदि जीवन की गूँज

जीने की अभिलाषा

लय भरा संगीत है, तो

वह अवश्‍य होगा।

यदि उसमें नदी का

कलकल नाद है

पंखियों का कलरव है

कोयल का कलघोष है, तो

वह अवश्‍य होगा।

यदि हम उत्‍तराधिकारी हैं

हमसे वंशावली है

हम योग का एक अंश हैं, तो

वह अवश्‍य होगा।

ब्रह्माण्‍ड की धधकती आग से

निकल कर शब्‍द ब्रह्म का

निनाद यदि है, तो

वह…

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Posted on September 24, 2014 at 8:24pm — 1 Comment

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At 10:09pm on September 24, 2014, savitamishra said…

बहुत बहुत आभार .....आपका...सादर नमस्ते स्वाविकार कर हमे अनुग्रहित करें

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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