For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Neet Giri
  • Male
Share on Facebook MySpace

Neet Giri's Friends

  • Gyanendra Nath Tripathi
  • Raj
  • raj jalan
  • shekhar jha`
  • Abhay Kant Jha Deepraaj
  • Hilal Badayuni
  • Aparna Bhatnagar
  • Arbind Jha
  • Deepak Sharma Kuluvi
  • jagdishtapish
  • आशीष यादव
  • advocate mukund vyas
  • Manoj Kumar Jha
  • Geyasuddin Shaikh
  • Prabhakar Pandey

Neet Giri's Groups

 

Neet Giri's Page

Profile Information

Gender
Female
City State
kolkata west bangal
Native Place
chapra bihar
Profession
student

Neet Giri's Blog

सुबह की किरण

मेरे आंगन में जब सुबह की पहली किरण आती हैं ,
तो कभी मैं उसको,
तो कभी अपनी माँ को निहारती हूँ ,
न जाने क्यों मुझे इन दोनों में
एक समानता सी लगती है 
उधर पूरब से भास्कर सफ़र शुरू करता है
और इधर माँ का दिन शुरू होता है
हाथ में जल का लोटा उठाये
कुछ मंत्रो के साथ,
हर सुबह मनमोहक हो जाती है
मेरे आंगन में जब सुबह की पहली किरण आती हैं ,

Posted on June 1, 2011 at 6:30pm — 4 Comments

दो शब्द प्यार के बोल कर देखो ,

दो शब्द प्यार के बोल कर देखो ,

दिल में उतर जाओगे ,

हर कदम पर साथ में पाओगे ,

मगर इसके लिए कुछ करना होगा ,

दो शब्द प्यार के बोलना होगा ,

भूलना होगा वो सब नफरत भरे शब्द ,

भूलने के बाद सोचने की जरुरत नहीं ,

कारण, नफ़रत सोचने के लिए नहीं होती,

सोचने के लिए तो बस प्यार होता हैं ,

मेरी बातो पे विश्वास ना हो तो ,

दो शब्द प्यार के बोल कर देखो ,

दिल में उतर जाओगे,

( राणा जी के सुझाव के अनुसार यह पोस्ट प्रबंधन स्तर से एडिट कर वर्तनी और…

Continue

Posted on June 25, 2010 at 7:30pm — 9 Comments

इस मुस्कुराहट का राज ,

मुस्कुराहट का राज़



मैं मुस्कुरा कर स्वागत करती हूँ ,

और वो हरदम पूछते हैं ,

इस मुस्कुराहट का राज़ ,

और मैं कहती हूँ ,

मैं हर दम खुश रहती हूँ ,

कारण गम मेरा हमदम नहीं हैं ,

खुशियों से हमने दोस्ती की हैं ,

अगर आप रोता हुआ चेहरा देखेंगे ,

और फिर करेंगे आप सवाल ,

क्या दुःख हैं हमें बतायो,

और मैं अपने दोस्तों को ,

अपने दुःख से दुखी न करूंगी ,

इसलिए आप को इस सवाल का ,

मौका नहीं दूंगी ,

हरदम खुश रहूंगी ,

अब समझ गए… Continue

Posted on June 25, 2010 at 6:30pm — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:13pm on June 21, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…


At 11:35pm on July 6, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 1:45pm on July 5, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 7:05pm on July 4, 2010, Admin said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Feb 28
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Feb 28

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service