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Vijay Joshi
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Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीया रवि भाई जी आभार , आपने मेरे लिए वक्त दिया। आपने विचारों से अवगत करवाया। आपके सुझाव पर और नया लिखने का प्रयास करने की कोशिश करुगा।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीय जनाब समर कबीर जी आभार , आपने मेरे लिए वक्त दिया। आपने विचारों से अवगत करवाया। आपके सुझाव पर और नया लिखने का प्रयास करने की कोशिश करुगा।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीया प्रतिभा जी आभार , आपने मेरे लिए वक्त दिया। आपने विचारों से अवगत करवाया। आपके सुझाव के लिये धन्यवाद। नया लिखने का प्रयास करने की कोशिश करुगा।हॄदय की अनन्त गहराइयों से आभार"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीया नीता जी आभार , आपने मेरे लिए वक्त दिया। आपने विचारों से अवगत करवाया। आपके सुझाव पर और नया लिखने का प्रयास करने की कोशिश करुगा।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आभार आदरणीय मिश्रा जी"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीय सर प्रभाकर जी आपने कथा पर जो पक्ष रखा है। अपने मेरे लिए समय देकर जो मार्गदर्शन व सुझाव दिये है। उस ओर ध्यान देकर सुधारात्मक प्रयास करुगा। बहुत समय बाद मंच पर आया हूँ। आपने में सम्मान दिया। आपका आभारी हूँ।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"उस्मानी जी आभार"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आभार आदरणीय सर जी"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"सर आदरणीय रवि जी अनुप्रास तो हुआ है। और गद्धय में अनुप्रास का प्रयोग करने की कोशिश की है। आपके सुझाव शिरोधार्य करता हूँ। कमेनट्स के लिए आभार।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीया अर्चना जी आपने सेहत व सोहरत के बीच का अच्छा अंतर को व्यक्त किया है। सेहत का पैसा कहाँ खर्च । युवा पीढ़ी के मनोभावो को अच्छी अभिव्यक्ति है। इस लघुकथा के लिए बधाई।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीय सर जी आपने कथा पर जो पक्ष रखा है। अपने मेरे लिए समय देकर जो मार्गदर्शन व सुझाव दिये है। उस ओर ध्यान देकर सुधारात्मक प्रयास करुगा। बहुत समय बाद मंच पर आया हूँ। आपने में सम्मान दिया। आपका आभारी हूँ।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आभार आदरणीय बहुत दिनो बाद शिरकत की है।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"शुक्रिया जनाब तस्दीक़ भाई जान"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आदरणीया रस्मी जी आभार , आपने मेरे लिए वक्त दिया। आपने विचानो से अवगत करवाया। आपके सुझाव पर अमल करने की कोशिश करुगा।"
Sep 29
Vijay Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"उजाला राधा को यह समझने या समझाने में दस वर्ष बीत गये, कि वैवाहिक जीवन का उद्देश्य केवल संतानोत्पत्ति ही है। इन दस सालों में कौन सा दिन ऐसा बिता होगा, जिस दिन उसे पति, परिवार, पड़ोसी,पनिहारिन, परिवेश, व पक्षधर ही नहीं, परायों से भी बाँझ होने का…"
Sep 29

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Profile Information

Gender
Male
City State
Maheshwar
Native Place
Maheshwar
Profession
Teacher's
"बटवारा"बटवारे का जब अभियान चला।दोनों बेटों में घमाशान चला।बस मैं छटता ही चला गया ।हर बटवारे में।तन्हाइयां मेरे ही हिस्से में ।मुझे छोड़ सब बट गया जब,कतरा–कहरा बराबर दो हिस्सों मेंजो तिनका तिनका कर जोड़ा था जीवन में।अब मैं बिल्कुल तन्हां था।साथ कोई न मेरा संचय अपना था।न मेरे अपने साथ रहना चाहते थे।न मैं किसी के हिस्सें आया था।एक जीवन संगिनी जो,सात जन्मों का वादा करमँझधार में ही छोड़ गई।जीवन की तन्हाई से मेरे नाता जोड़ गई।अब भी तन्हाई में रहता हूँ।पिता होने का दर्द सहता हूँ।– विजय जोशी 'शीतांशु'महेश्वर,जिला खरगोनरचना मौलिक एवम् अप्रकाशित है।

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At 8:15am on October 8, 2015, kanta roy said…
मेरा हौसला बढाने के लिए हृदयतल से आभार आदरणीय विजय जी । दिल को जिस काम को करने में खुशी मिले उस काम में वक्त का सच में मालूम ही नहीं पडता है कि कब दिन हुई और कब रात हुई । सादर अभिनंदन आपको ।

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बचपन (लघुकथा)~शीतांशु

1 ||बचपन||



मैं मध्य अवकाश के बाद हमेशा स्कूल से छूमंतर हो जाता । दीदी, अक्सर बैग उठाकर लाती । और घर पर मुँह बंद रखने के बदले मुझसे चॉकलेट जरूर लेती थी। किन्तु मैं बेफिक्र होकर कभी फूलों के लिए 'चम्पा की बॉडी', बेर के लिए नरसिंग टेकड़ी, तो कभी पिकनिक मनाने 'भेडलेश्वर-बड़दख्खन' के बाग में , नदी किनारे चले जाते था। और ठीक स्कूल छूट्टी के समय पर घर लौट आने का क्रम चलता रहा। मैडम की शिकायत भी दीदी संभाल लेती। दोस्तों के साथ नीम, इमली,आम के कई नन्हें पौधें गोबर के ढ़ेर व रुखड़े पर से निकाल कर… Continue

Posted on February 7, 2016 at 3:15am — 6 Comments

मौत के मुँह से (लघुकथा)

सोहन नर्मदा किनारे महिष्मति क्षेत्र में नर्मदा परिक्रमावासियो की लिए सदाव्रत प्रारम्भ करने जा रहा है। उसकी आँखों में वह दृश्य घूमने लगा। जल पीकर सीढ़ियों पर लेटे सोहन को बेहोशी छाने लगी। उस पार से आ रही एक नाव की सवारी ने उसे जगाया।

"भाई तू ब्राह्मण का बालक है ना ? यह अन्न दान लेI"

अपनी पहनी हुई धोती में वह अन्न लेकर सोहन मौत के मुँह से घर लौटा आया।

"आज घर में केवल दलिया शेष बची थी। तेरे पिता जी को जोरो से भूख लगी थी, सो मैंने खिला दी,बेटा|" स्कूल से लौटकर…

Continue

Posted on November 18, 2015 at 12:00pm — 4 Comments

प्रयास (लघुकथा)

"मधु ! पिता जी का खाना भेज दिया ?"

"हाँ ! बाबा हाँ ! रोज नियम से भेज देती हूँ।" रविवार रमेश स्वयं ही टिफिन लेकर चला जाता। उस दिन बाप -बेटे पुश्तैनी मकान में घण्टों बातें करते और शाम को घर लौटते समय पिता जी रमेश को हमेशा की तरह टोकते:

"बेटा ! बहु-बच्चों का ख्याल रखना।"

आज मधु की छोटी बहन-जीजा आये हुए, देखकर रमेश ने मधु को बिना कुछ बताये टिफिन सेंटर से खाना भर कर भिजवा दिया। मधु ने भी खाना भिजवा दिया। पिता जी की खुशियों का ठिकाना न था। आज रमेश प्रसन्नचित होकर घर पहुँचा तो मधु…

Continue

Posted on October 16, 2015 at 7:00pm — 5 Comments

 
 
 

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