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विजय कुमार अग्रहरि 'आलोक'
  • Male
  • लखनऊ
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विजय कुमार अग्रहरि 'आलोक''s Friends

  • योगराज प्रभाकर
 

विजय कुमार अग्रहरि 'आलोक''s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
लखनऊ
Native Place
इलाहाबाद
Profession
अध्यापन
About me
ईश्वर ने बहुत कुछ छीन लिया है. या यूं कहूं बहुत कुछ इकट्ठा दे दिया है. अब मै एक दूसरी ही शख्सियत हूं. जी हां दोस्तों, 2008 में अचानक ब्रेन हैमरेज से पहले मै जिन्दगी को एक अलग अन्दाज से देखा करता था. मेरे पास पूरा अख्तियार था मेरे अपने शरीर पर.पर अब दिमाग की बात दाहिना पार्श्व नही मानता. कविता आवेग तो लेती है दिमाग में, उसी परिचित अन्दाज में, पर उंगलियां उन्हें लय नही देती. संगीत खामोश हो गया है. कल कितने आसानी से तारों से खेला करती थीं वे उंगलियां. आज सितार सिरहाने पडा है. मेरे मन का, मै ही तो गा सकता हूं न. पर एक दूसरा नजरिया भी है. अब सब कुछ मेरे लिए 'बांए हाथ का खेल' है. ये बांए हाथ का खेल है तो कठिन पर मै स्टीफ़न हाकिन्स और अरुणिमा सिन्हा को भी पहचानता हूं.

विजय कुमार अग्रहरि 'आलोक''s Blog

कृष्ण तुमने छल किया है

कृष्ण तुमने छल किया है.

छलिया हो तुम

सारी दुनिया को काम पर लगा दिया

कह कर ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’.

 

फ़ल की आशा किससे न करे?

तुमसे?

चलो, तुम तो सखा हो

मीत को सताना तुम्हारा हक है.

प्रेम भी तो करते हो.

पर तुम्हारे जो ये कारिन्दें है न,

जीना मुश्किल कर दिया है.

हक मांगने जाओ, तो तुम्हारी बात दुहराते हैं.

अब, तुम तो आओगे नही

हमसे काम लेने.

वैसे तुम्हारा काम तो मै बिना दाम भी कर देता.

तुम…

Continue

Posted on September 9, 2016 at 8:30pm — 2 Comments

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मिथिलेश वामनकर
said…

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