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kanupriya Gupta
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kanupriya Gupta is now friends with आशीष यादव and Rekha Joshi
May 16, 2012

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on kanupriya Gupta's blog post कौन हो तुम ?
"रोमिल भावनाओं का भावुक समुच्चय.. वाह ! शुभेच्छा.. ."
Sep 15, 2011
kanupriya Gupta posted a blog post

आतंकवाद की भेंट चढ़ गई एक लव स्टोरी

वो मासूम सा लड़का उसे बचपन से भला लगता था ,छोटी छोटी सी आँखें,घुंघराले बाल ,वो हमेशा से छुप छुप के उसे देखती आई थी ,जब वो अपना बल्ला  लेकर खेलने जाता, अपने दीदी की चोटी खींचकर भाग जाता, मोहल्ले के बच्चो के साथ गिल्ली डंडा खेलता हर बार वो बस उसे चुपके से निहार लिया करती थी. जैसे उसे बस एक बार देख लेने भर से इसकी आँखों को गंगाजल की पावन बूदों सा अहसास मिल जाता था . घर की छत  पर खड़ा होकर  जब वो पतंग उडाता वो उसे कनखियों से देखा करती थी जेसे जेसे उसकी पतंग आसमान में ऊपर जाती, इसका दिल भी जोरों से…See More
Sep 15, 2011
kanupriya Gupta replied to Er. Ganesh Jee "Bagi"'s discussion क्या हम लेखको का हक मार रहे है ?
"aapki baat se poori tarah sahmat hu......dhanyawad jo aapne ye mudda uthaya.ye sach hai lekhak sirf tippani chahta hai agar pratisaaad (jo lekhak ke lie prasad hota hai)na mile to likhne me maja nahi aata"
Aug 23, 2011
kanupriya Gupta posted a blog post

हे अतिथि (कसाब) तुम कब जाओगे ?"

कल शाम से ही स्वर्ग और नरक या कहे तो जन्नत और जहन्नुम  दोनों में हडकंप मचा हुआ है कारण आप सब जानते है. वो एसा कारण तो है ही जिसके कारण हडकंप मच सके आखिर उसने २६ नवम्बर २००८ को पूरे मुंबई में हडकंप मचा दिया था. हाँ में उसी महान (अन्यथा ना ले पर पिछले दो साल से जिस तरह से उसे सर आँखों पर बिठाकर उसकी मेहमाननवाजी कर  रहे  हैं उसे देखकर अब यही लगता है) आतंकवादी ,हत्यारे कसाब की बात कर रही…See More
Jul 30, 2011
kanupriya Gupta posted a blog post

कौन हो तुम ?

 कौन हो तुम ?अलसाई सी सुबह में कोमल छुवन के अहसास से होअनजाने चेहरों में एक अटूट  विश्वास से हो... गडगडाते  बादलों में सुरक्षा के अहसास के जैसे,काँटों भरी दुनिया में स्वर्ग के पारिजात के जैसे बद्दुआओं की भीड़ में ईश्वर के आशीर्वाद से तुमलम्बे समय के मौन में आँखों के संवाद से तुम... लड़कपन की उम्र में कनखियों  के प्यार तुम,हर मोड़ की हार के बाद आशाओं के विस्तार तुम. सूनी आँखों से बोलने वाले मेरे मन की बात हो तुममेरे निष्पाप प्यार हो या प्रेम निस्वार्थ हो  तुम झुलसती गर्मी में बरसाती फुहार से…See More
Jul 29, 2011
PREETAM TIWARY(PREET) left a comment for kanupriya Gupta
Jul 23, 2011
Admin left a comment for kanupriya Gupta
Jul 22, 2011
kanupriya Gupta updated their profile
Jul 22, 2011
kanupriya Gupta is now a member of Open Books Online
Jul 22, 2011

Profile Information

Gender
Female
City State
mumbai maharashtra
Native Place
bhopal
Profession
public relation officer
About me
में कनुप्रिया गुप्ता अलग अलग क्षेत्रों में काम किया है मैंने और अलग विषयों की पढाई की है कभी बैंकर थी अभी जनसंपर्क अधिकारी हू .पिताजी सिविल इंजिनियर है इसलिए अलग क्षेत्रों में रहने का का अवसर मिला घाट घाट का पानी पिया मैंने.पढने का शौक पिताजी से मिला और लिखने का शौक खुद पाल लिया. शादी के बाद मुंबई आ गई पर लिखती अब भी हू .

Kanupriya Gupta's Blog

आतंकवाद की भेंट चढ़ गई एक लव स्टोरी

वो मासूम सा लड़का उसे बचपन से भला लगता था ,छोटी छोटी सी आँखें,घुंघराले बाल ,वो हमेशा से छुप छुप के उसे देखती आई थी ,जब वो अपना बल्ला  लेकर खेलने जाता, अपने दीदी की चोटी खींचकर भाग जाता, मोहल्ले के बच्चो के साथ गिल्ली डंडा खेलता हर बार वो बस उसे चुपके से निहार लिया करती थी. जैसे उसे बस एक बार देख लेने भर से इसकी आँखों को गंगाजल की पावन बूदों सा अहसास मिल जाता था . घर की छत  पर खड़ा होकर  जब वो पतंग उडाता वो उसे कनखियों से देखा करती थी जेसे जेसे उसकी पतंग आसमान में ऊपर जाती, इसका दिल भी जोरों…

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Posted on September 15, 2011 at 10:30am

हे अतिथि (कसाब) तुम कब जाओगे ?"

कल शाम से ही स्वर्ग और नरक या कहे तो जन्नत और जहन्नुम  दोनों में हडकंप मचा हुआ है कारण आप सब जानते है. वो एसा कारण तो है ही जिसके कारण हडकंप मच सके आखिर उसने २६ नवम्बर २००८ को पूरे मुंबई में हडकंप मचा दिया था. हाँ में उसी महान (अन्यथा ना ले पर पिछले दो साल से जिस तरह से उसे सर आँखों पर बिठाकर उसकी…

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Posted on July 30, 2011 at 2:30pm

कौन हो तुम ?

 

कौन हो तुम ?

अलसाई सी सुबह में कोमल छुवन के अहसास से हो

अनजाने चेहरों में एक अटूट  विश्वास से हो...

 

गडगडाते  बादलों में सुरक्षा के अहसास के जैसे,

काँटों भरी दुनिया में स्वर्ग के पारिजात के जैसे

 

बद्दुआओं की भीड़ में ईश्वर के आशीर्वाद से तुम

लम्बे समय के मौन में आँखों के संवाद से तुम...

 

लड़कपन की उम्र में कनखियों  के प्यार तुम,

हर मोड़ की हार के बाद आशाओं के विस्तार तुम.

 

सूनी आँखों से…

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Posted on July 29, 2011 at 11:30am — 1 Comment

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At 9:22am on July 23, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 7:09pm on July 22, 2011, Admin said…

 
 
 

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Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ , नमस्कार , प्रस्तुत कविता को मान देने के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
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Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुश्री बबीता गुप्ता जी , इस छोटी सी कविता को स्वीकार कर मान देने के लिए आपका आभार एवं…"
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