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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog – February 2018 Archive (5)

प्यार के दो बोल मीठे...



  बह्र:- 2122-2122-2122-212

होश खोकर मैं न पल्लू में सिमट जाऊं कहीं।।

'इस तरह बहकूँ न होटों से लिपट जाऊँ कहीं'।।

'डरते डरते आज अपनी उम्र के इस खेल में ।

इश्क़ के दो बोल सुनकर ही न पट जाऊँ कहीं'।।

'ये फ़ज़ाएँ शौख़ कमसिन छेड़ती हैं जिस्म को।

कांपते हैं ये क़दम मैं न रपट जाऊँ कहीं'।।

एक जर्रा चाहता हूँ प्यास से झुलसा हुआ।

कि समंदर बावला ले कर उलट…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 24, 2018 at 2:00pm — 4 Comments

अब समझ में नहीं आरही बेरुख़ी..

बह्र -212-212-212-212

मैने कह तो दिया जिंदगी आपकी।।

अब समझ में नहीं आ रही बेरुख़ी ।।

धड़कनें दिल की अपनी जवां गिन कहो।

क्या  बदलती न  मेरे लिए आज भी।।

आप समझें मुझे गर खिलौना न गम।

मुझको स्वीकार है ना समझ आशिक़ी।।

प्यार अहसास जुल्मों सितम रख लिए।

आगे चलकर मिले न मिले यह सभी।।

जिसकी रग में मुहब्बत की स्याही बहे।

वो कलम क्या बगावत लिखेगी कभी।।

कितना छांटो या काटो या मोड़ो…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 23, 2018 at 8:30am — 3 Comments

इस नशेमन की मोहलत है तबतक...

बह्र:-2122-1221-22

वक्त बे वक्त का आसरा है।।

घर का टुटा हुआ जो घड़ा है ।।1

  जो  मुहब्बत में अपनी बिका है।

उसको दौलत ओ शुहरत से क्या है ।।2

जब समझलो की क्या माजरा है।

बोल बोलो नही कुछ बुरा है।।3…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 11, 2018 at 8:30pm — 2 Comments

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ

मापनी :-

1212-1122-1212-112

शुरू कहाँ से करूँ ओऱ कहाँ से बात करूँ।।

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ।।

मुझे तो इतना तज्ज्रिबा नहीं मुहब्बत की।

फ़िसल वो जाएं शुरू मैं जहां से बात करूँ।।

कोई हसीन सा किरदार जिंदगी से जुड़े।

यही है चाह की उल्फत की हाँ से बात करूँ ।।

समझ समझ के समझ को समझ न पाए हमीं।

की किससे कौन अदा से जुबाँ से बात करुं।।

मेरे हबीब मेरे रब मेरी अना में अभी।

है इतनी चाह जमीं आसमाँ से बात…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 9, 2018 at 6:22pm — 3 Comments

तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता

बहर :-1212-1122-1212-22

गरीब वो हैं कि जिनका मकां नहीं मिलता।।

अमीर वो जो कभी खामखां नहीं मिलता।।

कोई भी शख़्स मुझे खुश नुमां नहीं मिलता।।

मुझे तो दर्द भी हँस कर मियां नहीं मिलता।।

मैं ढूंढता हूँ खुद का निशाँ नहीं मिलता।।

शह्र में तेरे मिरा हम जुबाँ नहीं मिलता।।

मिले बहुत से मगर और बात है तुम में।।

तुम्हारे जैसा कोई खुशनुमां नहीं मिलता।।

कसम भी प्यार में खाई कसम को तोड़ा भी।

हाँ यार…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on February 8, 2018 at 5:55pm — 8 Comments

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