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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog – April 2019 Archive (4)

हरेक बात में उसका जवाब उल्टा है ।



1212-1122-1212-22

हरेक बात पे उसका जवाब उल्टा है ।।

मगर वो प्यार मुझे बेशुमार करता है।।

वो मेरे इश्क-ए- मरासिम* बनाएगा' इकदिन यूँ।(प्यार के रिश्ते)

बड़े यकींन से उल्फ़त की बात करता है।।

यूँ बर्फ आब-ओ-हवा वादियों से गुजरी हो।

उसी तरह से मेरा ज़िस्म अब पिघलता है।।

कभी भी वक्त न ठहरा हुआ लगे मुझको।

के चावी कौन भला सुब्ह शाम भरता है।।

यकीं न हो तो जरा गौर कर के देखो तुम ।

तुम्हारी आँख में भारी तुम्हारा'…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on April 27, 2019 at 12:30pm — 3 Comments

नफ़स की धुन नही थमीं...



हजज़ मुरब्बा मक़बूज

अरकान :-  मुफाइलुन मुफाइलुन (1212-1212)

मुझे  उसी  से प्यार हो ।।

जो तीर दिल के पार हो ।।

पहाड़ जैसी' जिंदगी ।

कोई तो दाबे'दार हो।।

सवाल  बस मेरा यही ।

अदब ओ ऐतबार हो।।(शिष्टाचार,विश्वास)

नफ़स की  धुन नहीं थमें।(आत्मा,soul)

कोई भी कितना यार हो।।

लुग़त* की …

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Added by amod shrivastav (bindouri) on April 24, 2019 at 11:00pm — 1 Comment

कोई तो दीद के क़ाबिल है आया

1222-1222-122

श'हर  में शोर ये  फैला हुआ है ।।

पडोसी गाँव में मुजरा हुआ है।।

कोई तो दीद के क़ाबिल  है आया ।

यहाँ दो दिन से ही परदा हुआ है।।

वतन की आबरू कैसे बचाए।

म'सलतन आज ही सौदा हुआ है।।

जरा देखूं सराफ़त छोड़ कर के ।

सुना है नाम कुछ अच्छा हुआ है।।

अजां पढ़ ले या बुत की आरती को ।

सभी कुछ आज…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on April 21, 2019 at 10:47am — 3 Comments

समय के साथ भी सीखा गया है ।

122-2122-2122



समय के साथ भी सीखा गया है ।।

ये गुजरा दौर भी बतला गया है ।।

मेरी मजबूरियां अब मत गिनो तुम ।

मेरे संग हो तो सब देखा गया है ।।

सभी उस्ताद बनकर ही नहीं हैं।

मुझे अधभर में ही रख्खा गया है ।।

ये तेरा प्रेम कब छूटेगा मुझसे ।

मेरे चहरे में ये बस सा गया है ।।

मेरे भी चाहने वाले मिलेंगे।

मुझे कहकर यही बिछड़ा गया है ।।

कभी वो इन्तेहाँ मेरा भी ले…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on April 17, 2019 at 11:30am — 5 Comments

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