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दिनेश कुमार's Blog – September 2016 Archive (2)

ग़ज़ल -- मेयार शायरी का क़ायम जनाब रखना ( दिनेश कुमार दानिश )

221--2122--221--2122



मेयार शायरी का क़ायम जनाब रखना

ता-उम्र फ़िक्रो-फ़न के ताज़ा गुलाब रखना



जाती है जान जाए लेकिन न कम हो इज़्ज़त

सहराओं के मुक़ाबिल क्या चश्मे आब रखना



देना हिसाब होगा हम सबको रोज़-ए-महशर

गठरी में तुम भी अपनी कुछ तो सवाब रखना



तहज़ीब का तक़ाज़ा कहता है औरतों को

शर्मो हया का हर पल रुख़ पर नक़ाब रखना



हर वक़्त भागना ही जीवन नहीं है प्यारे

साँसों के इस सफ़र में कुछ सब्रो-ताब रखना



उम्मीद पर टिकी… Continue

Added by दिनेश कुमार on September 28, 2016 at 7:17am — 2 Comments

ग़ज़ल -- हरगिज़ न हमको मूकदर्शक पासबानी चाहिए ( दिनेश कुमार 'दानिश' )

2212--2212--2212--2212



हरगिज़ न हमको मूकदर्शक पासबानी चाहिए

दुश्मन का मुँह जो तोड़ दे अब वो जवानी चाहिए



फ़िरक़ा परस्ती की जड़ों को काटना है गर हमें

लफ़्ज़े-सियासत के लिए उम्दा म'आनी चाहिए



ये क्या कि हम बँटते गए दैरो-हरम के नाम पर

जम्हूरियत जब हो, रेआया भी सयानी चाहिए



उस उम्र में बच्चों के हाथों में यहाँ हथियार हैं

जिस उम्र में ख़ुशियों की उनको मेज़बानी चाहिए



ग़ुरबत अशिक्षा भुखमरी के मुद्दए तो गौण हैं

संसद में चर्चा… Continue

Added by दिनेश कुमार on September 26, 2016 at 5:32am — 4 Comments

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"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
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"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
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