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ग़ज़ल -- ज़िन्दगी की ग़ज़ल हो रही है ( दिनेश कुमार )

212___212___212___2

बे-ख़ुदी के हसीं मरहले में
चैन दिल को मिला मयकदे में

हौसला जब मिटा हादसे में
मुश्किलें बढ़ गईं रास्ते में

हमसफ़र मेरा कोई नहीं था
यूँ बहुत लोग थे क़ाफ़िले में

इश्क़ में डूब जाओ तुम इतना
क़ुर्ब महसूस हो फ़ासले में

ग़ौर से मेरे चेहरे को पढ़िए
है उदासी निहाँ क़हक़हे में

बोल कर सच मैं तकलीफ़ में हूँ
वो झूठा है देखो मज़े में

ज़िन्दगी की ग़ज़ल हो रही है
बँध रहे दर्दो-ग़म क़ाफ़िये में

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by surender insan on August 8, 2017 at 2:29pm
आदरणीय दिनेश जी आदाब। हर शे'र लाजवाब जी । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें जी ।
Comment by Ravi Shukla on August 8, 2017 at 10:03am

आदरणीय दिनेश जी बढि़या गजल कही आपने । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

Comment by Gurpreet Singh jammu on August 7, 2017 at 11:29am

खूबसूरत अशआर से सजी इस शानदार ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई  आदरणीय दिनेश कुमार जी 

Comment by Mohammed Arif on August 7, 2017 at 8:36am
आदरणीय दिनेश जी आदाब, हर शे'र लाजवाब । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2017 at 5:20pm

आदरणीय दिनेश भाई , खूबसूरत गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by surender insan on August 6, 2017 at 8:37am
आदरणीय भाई दिनेश कुमार जी आदाब। सभी अशआर बहुत उम्दा हुए है शेर दर शेर दिली मुबारक़बाद क़बूल करे जी।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 6, 2017 at 8:00am
बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई आदरणीय पंकज जी..सादर बधाई
Comment by Samar kabeer on August 5, 2017 at 3:30pm
जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
कृपया मंच पर अपनी सक्रियता बनाएं ।
Comment by Sushil Sarna on August 5, 2017 at 3:03pm

ग़ौर से मेरे चेहरे को पढ़िए
है उदासी निहाँ क़हक़हे में

वाह क्या बात है आदरणीय बहुत सुंदर अशआर कहे हैं आपने ... दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।

Comment by Gajendra shrotriya on August 5, 2017 at 12:24pm
सभी अशआर अच्छे हुए हैं आदरणीय दिनेश कुमार जी। आपका रचनाकर्म सतत प्रवाहशील रहे। मेरी शुभकामनाएँ स्वीकार करें।

कृपया ध्यान दे...

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