सड़क के किनारे छाँव देता
एक दायरे के भीतर कैद
खुद घुटता हुआ मगर
हमें साँसें देता हुआ वृक्ष
कंक्रीट की घेराबंदी से
छोटी सी सीमा रेखा
में बंधा हुआ वह पेड़
और पिजड़े मैं कैद
मासूम और बेबस पक्षी
दोनों में कितना साम्य है
दोनों ही जीवित हैं
लेकिन स्वतन्त्रता को खोकर
दोनों की ही हदें
मानव ने बाँध दी हैं
और अब वे बस हमारी
आवश्यकता का साधन हैं
लेकिन वृक्ष पक्षी से
कहीं अधिक बेबस…
ContinueAdded by Tanuja Upreti on November 4, 2015 at 4:30pm — 8 Comments
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