For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Amod shrivastav (bindouri)'s Blog – July 2015 Archive (6)

बेबस इमान (बेईमानी का थिल्हाव)

ईमानदारी

कही न कही

हर बार हार कर...

अकेले में मुझसे

बस

सुगबुगाते

बात करती है ...

और मन ही मन

बड़ी पंडित बन

इमान को दरिद्रा स्थित

पर

दुद्कारती है....



ईमान

अपनी परिस्थित को

चुप चाप

फटी सी साफी

में पोंछ लेता है....

और

सांसे

एक आह ले

अपनी बेज्जती सह

प्रवाह मंद कर

बहतीं हैं...

आज परिस्थित ही

ऐसी है ....

सच की ......

यह मुह उठा कर

कभी जवाब नहीं

देता… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on July 16, 2015 at 12:10am — No Comments

विद्यालय ....(भविष्य)

दरवाजे से घुसता
चला आ रहा था भविष्य ...
मेरे भारत का
कुछ भूत में बनी
पोथीयों का बोझ लादे....

निर्भीक...
निःसंशय ...
जैसे...रवि/
पूरब से अंधकार को
धकेलता चला आ रहा हो...

मुश्कुरता...
खिलखिलाता....

जैसे ......प्रकृति

लिख रही है /नए जीवन /नए मंच
/नयी आकृति
सुबह की /ताजी हवा /नया सा स्वाद ले के...


June 25 at 6:37am मौलिक अप्रकाशित

Added by amod shrivastav (bindouri) on July 16, 2015 at 12:06am — No Comments

पसीने का एक बूंद(श्रमिक संघर्ष)

पसीने काबूंद

माथे से उपज

ठिठकता /चलता या बहता

निचे की ओर

रुख और अधरों

का सरोकार करते हुए

चुमते/बिदा लेते/रु-बरु

आ पहुचा ...

ह्रदय के पास

मन में अंगड़ाई ले

कहने लगा

मुझे कबूल कर ले

बस यहीं ठहर जाउंगा.....

मृदा को मर्दित करता

श्रमिक (किसान)

धराशाई करता है

थकावट /

और पसीने की बूंद की अर्जी

लगा रहता है

कर्म और मेहनत

का बिस्वास ले

तपती/

सूखी /बंजर /

जमीं को

सींचता है

पूरा… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on July 16, 2015 at 12:02am — No Comments

कमी रह गयी...

जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गई
प्यार की सब किताबे धरी रह गई

रोज मिलते रहे दर्दों गम हर गली
जिंदगी बस कड़ी की कड़ी रह गई

खामोश आँगन मेरा सुगबुगाता रहा
आँखों में बारिश की झड़ी रह गई

खुशियाँ रूठी तो बाहर निकली इस कदर
दरवाजे की कड़ी लगी रह गई

कलम उछली खुद को नचनियां समझ
प्रे म पत्रों की तबियत बिगड़ी रह गई

जस्न मनाये तो बिंदोरी मनाये किस तरह
रोशनी बस घडी दो घडी रह गई

Added by amod shrivastav (bindouri) on July 15, 2015 at 11:50pm — No Comments

.ये हवा भी किस तरफ

ये हवा भी किस तरफ चलने लगी है
हर तरफ बस मौत ही जड़ने लगी है
----
----
आज सरकारी गवाहों को मसल के
राजनीति आँगन पे हगने लगी है
----
-----
मुंडवा के जो निकल आई समझने
राजनीति चाय पे मरने लगी है
------
अप्रकाशित-----आमोद बिन्दौरी

Added by amod shrivastav (bindouri) on July 15, 2015 at 11:48pm — No Comments

गजल...दूर रह के हमें मिला क्या है

दूर रह के हमें मिला क्या है।
आज कहने दो कायदा क्या है।।

मौसमो की जुबनियाँ सुन लो।
कह रहा है जो वो नया क्या है।।

थाम सकता हूँ उसके दामन को।
प्यार जो हो गया बुरा क्या है।।

खिल खिलाया करो कभी खुलकर।
इश्क हो तुम मेरा हया क्या है।।

हम सभल जाए राहें उल्फत में
रोज मरने से फायदा क्या है।।

अप्रकाशित ...आमोद बिन्दौरी

Added by amod shrivastav (bindouri) on July 15, 2015 at 11:30pm — 5 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post अन्तस्तल
"नमस्कार, मित्र बृजेश जी। इतने समय उपरान्त आपका मेरी रचना पर आना सुखद एवं आत्मीय लगा। मान देने के…"
2 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ☺"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' and Pratibha Pandey are now friends
4 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद चढी़ धूप तीखी चले काम पर बशर चल पडे़ हैं सभी धाम पर खडी़ गाडियाँ हैं , स्कूटर चले चले…"
9 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ये ज़ीस्त रोज़ सूरत-ए-गुलरेज़ हो जनाब(६३)
"शुक्रिया ब्रज साहेब हौसला आफजाई के लिए "
9 hours ago
Profile IconParvez Ahmad, Nitin Bansal and Manav Das joined Open Books Online
10 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"न ही गाय है ये न ही भैस है, तनिक ध्यान देखो निशां लैस है । :)"
11 hours ago
Samar kabeer replied to Er. Ambarish Srivastava's discussion तोमर छंद in the group भारतीय छंद विधान
"जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब आदाब, तोमर छन्द के बारे में आज ही पता चला,बहुत उम्द: जानकारी दी आपने इसके…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई वासुदेव जी, सुंदर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
14 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
" 1 ]  भैंस  ! ! !  गाय को गाय ही रहने दो इसे भैस न कहो।//पर मुझे तो…"
15 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय  बासुदेव भाईजी चित्र अनुरूप इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। कुछ कमी रह गई चार पद और…"
16 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service