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Seemahari sharma's Blog – August 2014 Archive (3)

गीत ' सदियों से ढूँढूं मैं कान्हा'

तम में छिपते श्याम

घटा से

कभी छिपते सित भौर

सदियों से ढूँढूं मैं

कान्हा

पाऊँ ओर ना छोर

...

घोर तिमिर की छाया

में तुम

क्षण दर्पण देते हो

धुंध कुहासा हट

ना पाये

पल अर्पण लेते हो

तुम अदृश्य अनंत

अविनाशी

बंधें भी कैसे डोर

...

गोपियों के प्रेम में

बसकर

भक्ति में हँसते हो

योगिराज युग युग

से,तंदुल

मित्र कभी रमते हो

ज्ञान भक्ति पथ हो

कोई भी

कर्म बिना नहीं ठौर



सीमा हरि… Continue

Added by seemahari sharma on August 18, 2014 at 1:23am — 12 Comments

गीत

'मैया नैहर ना बिसराये'



अबहूँ न वीरा मोरे आये,

सावन सगरा बीता जाये,

बेकल मन में याद सताये,

मैया नैहर ना बिसराये।



मैया हमारी बाँट जोहती,

बहना छोटी झर झर रोती,

बाबुल मन माही घबराये,

मैया ...





भावज के संग हँसी ठिठोली,

झूला झूलती सखियाँ भोली,

वो ही अल्हड़ से दिन भाये।

मैया....



सीने में मैया के सिमटना,

भैया से जिद कर के लड़ना,

नैना नेहा से भर आये

मैया....



बाबुल की अँखियों से… Continue

Added by seemahari sharma on August 10, 2014 at 11:30am — 10 Comments

घनाक्षरी

नित्य प्रति दिनकर,संग आके किरनों के,
बड़े प्यार ही से सारे ,जग को जगाता है।
तप करता है जब,खुद ही को जला जला,
सारी धरती को रवि,तभी तो तपाता है।
सुप्त हुए सब अंग,काले काले सब रंग,
लाके साथ सप्त रंग,जग को हँसाता है।
दिन रात आते जाते,भ्रम अपना बनाते,
सूरज तो कभी कहीं,आता है न जाता है
सीमाहरि शर्मा 1.08.2014
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by seemahari sharma on August 1, 2014 at 7:00pm — 14 Comments

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