For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

SHARAD SINGH "VINOD"'s Blog (8)

अहा! वत्सला मातृ द्रष्टा हुआ मैं।

भुजंग प्रयात छन्द (122 -122-122-122)



बड़ा तंग करता वो करके बहाने,

बड़ी मुश्किलों से बुलाया नहाने।

किया वारि ने दूर तंद्रा जम्हाँई,

तुम्ही मेरे लल्ला तुम्ही हो कन्हाई।



कभी डाँटके तो कभी मुस्कुरा के,

करे प्यार माता निगाहेँ चुराके।

बड़े कौशलों से किया मातु राजी,

पढ़ो लाल जीतोगे जीवन की बाजी।



सुना जी हिया-उर्मि के नाद को…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on February 25, 2018 at 12:37pm — 3 Comments

'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......

11-02-2018 "मधुर" जी के स्मृति में भावभीनी श्रद्धाञ्जलि

छन्द विधा : शक्ति छंद

*********************

कहां प्यार ऐसा मिलेगा कहीं,

हमारे सखा सा जहां में नहीं।

दिया प्यार इतना कि कर्जित हुए,

हुई आंख नम जो थे गर्वित हुए।

 

हमारा सभी का बड़ा भाग था,

अकल्पित उन्हीं पे झुका राग था।

"मधुर" जी में किंचित नहीं द्वेष था,

 अकिंचन हुआ आज जो शेष था।

 

कहीं राग बिखरे कहीं…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on February 19, 2018 at 3:30pm — 5 Comments

: भई विचलित व्रत, रति सत्ता से : 26/07/2005

हो न कभी राग रति से, यही लिया व्रत ठान |

कर लूँ कुछ सत्कर्म सृजित , हो मेरा यश गान |

बेधा उर रति-बान ने, दीक्षा पे आघात |

छंदरूप मृदु गात लखि, व्रत है टूटा जात ||

 

अपलक भए नेत्र मोरे, देखि अनुप रूप को |

वक्ष गिरि, कटि गह्वर, रसद मधुर गात है |

मचलै ना माने हिय लोचन निहार हार |

कबरी पे आँचल फसाए चाली जात है |

कर्ण-कुण्डल कपोल छुए, अधर सोहे मूँगे सा |

नयना कमल हो मानो मुखड़ा प्रभात है |

पाँव से शीश लाइ, समांग…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on June 4, 2015 at 7:30pm — 8 Comments

-: खींच अहं के मग से डग प्रभु :-

-: खींच अहं के मग से डग प्रभु :-  (संसोधित)

खींच अहं के मग से डग प्रभु,

रख लें अपने चरणों में ||

है परम कांति अरु चरम शांति जो,

और किसी ना शरणों में |

सजा हुआ मद की बेड़ी मे,

जड़ा हुआ हूँ कहीं सिखा पर,

तोड़ एकांकी अहं का आसन,

मिला लें पद रज-कणों में |

खींच अहं के मग से डग प्रभु,

रख लें अपने चरणों में ||

यह राह नहीं है सीधा-सादा ;

मैं निकल पड़ा जिसपर |

रसहीन…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on May 25, 2015 at 8:00pm — 12 Comments

प्रकृति की पड़ी मार सबने सहा

हमें ईश से ढेर सारे गिले |

नहीं अब सहारा कहीं पे मिले |

प्रभो शक्ति जितना हमें है दिया |

बड़ी मुश्किलों से सहारा किया ||

 

प्रकृति की पड़ी मार सबने सहा |

महल स्वप्न का देखते ही ढहा |

छिना छत्र माता पिता का कहाँ ?

बची फ़िक्र भूखी बहन का यहाँ ||

 

अभी गति हमारी बड़ी दीन है |

बिना नीर जैसे दिखे मीन है |

प्रकृति के कहर से बहन भी डरी |

बड़ी मुश्किलों से डगर है भरी ||

 

मौलिक व…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on May 16, 2015 at 7:47pm — 2 Comments

मुकरियाँ- 'वोट' (मताधिकार) प्रक्रिया पर प्रकाश

मुख भोला है भली पोशाक |

मैं भी तत्पर हुई बेबाक |                          बेबाक= निर्भीक|

किसे पता की मन में खोट|

कह सखि साजन ? ना सखि वोट |

 

कमरे में घुसते ही जाँचै |

उलटि पलटि वह ठहि के बाँचै |                  ठहि= स्थिर, इत्मीनान; बाँचै= निरखना, पढ़ना |

आँखों से मारै जस चोट |

कह सखि साजन ? ना सखि वोट |

 

ना छोड़ै जब अवसर आवे |

अंगुली पकड़त दाग लगावे |

ना पहचानै बड़ा न छोट |

कह सखि साजन ? ना सखि वोट…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on January 1, 2015 at 6:30pm — 17 Comments

संक्रमित संस्कृति बनाम प्रदूषण

संक्रमित संस्कृति हमारी, सभ्यता गतिमान है |

सद्कथाएँ मिथ न हों इसका हमे ना भान है |

पर्यावरण दूषित हुआ यह क्या नही प्रमाण है ?

लुप्तप्राय कुछ जंतु जिसमें गरुण का अवसान है |

 

अंधानुकर विज्ञान का यह क्या हमारी भूल है ?

उस कृत्य से वंचित हुए हम जो जीवन का मूल है ?

सारा जहाँ ही देखिये जिस कृत्य में मसगूल है,

भौतिकता की चाह में सर्वत्र चुभता शूल है |

 

कल्पतरु मेरी ये वसुधा अनगिनत उपहार देती,

थोड़ा भी यदि श्रम करें…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on December 29, 2014 at 3:00pm — 14 Comments

"लुटा हाट में नोट वोटें बटोरे",-

चुनावी समा बाँधना हो जभी वो,

गली में लुटाते रुपैया तभी वो|

लुटा हाट में नोट वोटें बटोरे,

यही वो घड़ी जो भुनाते चटोरे ||

 

बनायें-बिगाड़ें, सभी पे तुले वो,

इसारा मिले बर्तनें भी धुलें वो|

दिखे जो हुआ आपसे वोट लेना,

विजेता हुए तो, अधेला न देना ||

 

कभी ज्ञान की  ज्योंति जाया न होगी,

बली पुष्ट होते निरा मूढ़-रोगी |

मिटाये अँधेरा डगोँ को बढ़ाए,

यही ज्योंति प्रेरा शिखा पे…

Continue

Added by SHARAD SINGH "VINOD" on December 21, 2014 at 6:00pm — 11 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
yesterday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service