For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)

(221 2121 1221 212)

जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी
हँस,खेल,मुस्कुरा तू क़ज़ा से न डर अभी

आयेंगे अच्छे दिन भी कभी तो हयात में
मर-मर के जी रहे हैं यहाँ क्यूँँ बशर अभी

हम वो नहीं हुज़ूर जो डर जाएँँ चोट से
हमने तो ओखली में दिया ख़ुद ही सर अभी

सच बोलने की उसको सज़ा मिल ही जाएगी 
उस पर गड़ी हुई है सभी की नज़र अभी

हँस लूँ या मुस्कुराऊँ , लगाऊँ मैं क़हक़हे
ग़लती से आ गई है ख़ुशी मेरे घर अभी

मंज़िल बुला रही है मुझे कब से दोस्तो
है मेरे  इंतिज़ार में सूनी डगर अभी

क्यों चहचहा रही हैंं परिंदों की टोलियाँ
सूरज है सर पे देख हुई दोपहर अभी

* मौलिक एवं अप्रकाशित.

Views: 1283

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सालिक गणवीर on August 17, 2020 at 4:13pm

भाई dandpani nahak जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम.

Comment by सालिक गणवीर on August 8, 2020 at 3:36pm

भाई ब्रजेश कुमार जी

सादर अभिवादन

ग़ज़ल पर आपकी हाजिरी और सराहना के लिए हृदयतल से आभार.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 8, 2020 at 3:08pm

बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय सालिक जी...आदरणीय समर जी एवं रवि जी की विवेचना भी शानदार रही..

Comment by सालिक गणवीर on July 8, 2020 at 7:44am

आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिब

आदाब

ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और सराहना के लिए आपका तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ. ये  उस्ताद-ए-मुहतरम समर कबीर साहिब और आप जैसे गुणीजनों के मार्गदर्शन एवं स्नेह का ही परिणाम है कि मुझ जैसे अदने शाइर की रचना को फीचर ब्लॉग में स्थान मिला. इसके लिए मैं आप सब का एवं ओबीओ प्रबंधन का शुक्रगुजार हूँ. सादर.

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 7, 2020 at 12:11pm

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, शानदार ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ साथ ही ग़ज़ल को फीचर ब्लॉग में शामिल होने पर ख़ास मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए। सादर। 

Comment by सालिक गणवीर on July 7, 2020 at 6:47am

आदरणीय समर कबीर साहिब

आदाब.

टंकन त्रुटि का अंदाजा हो गया था उस्ताद-ए-मुहतरम, इसलिए रवि साहब द्वारा सुझाए गए मिसरे का इस्तेमाल कर लिया. बहुत शुक्रिया आपका. आपका दिन शुभ हो.

Comment by Samar kabeer on July 5, 2020 at 3:18pm

//जाना है एक दिन तो न कर फ़िक्र तू अभी//

मेरे सुझाए इस मिसरे में टंकण त्रुटि हो गई है,इसे यूँ पढ़ें:-

जाना है एक दिन तो न तू फ़िक्र कर अभी'

Comment by सालिक गणवीर on July 5, 2020 at 11:12am

प्रिय रुपम

आदाब

ग़ज़ल पर हाज़िरी और सराहना के लिए मश्कूर-ओ-ममनून हूँ. शुक्रिया बालक.

Comment by सालिक गणवीर on July 5, 2020 at 11:09am

आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' साहिब

आदाब.

ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति एवं सराहना के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ. आपकआपकी इस्लाह का ही इंतिज़ार कर रहा था.आपके सुझाव पर अमल करने के बाद पुनः पोस्ट करता हूँ. सादर.

Comment by सालिक गणवीर on July 5, 2020 at 11:04am

आदरणीय समर कबीर साहिब

आदाब

ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और सराहना के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ. आपकी क़ीमती इस्लाह पर अमल करने के बाद ,पुनः पोस्ट करता हूँ. सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
10 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
10 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
13 hours ago
Admin replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"लगभग 90 हजार प्रति वर्ष"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर नमस्कार और आदाब सम्मानित मंच। ओबीओ के वाट्सएप समूह से इस दुखद सूचना और यथोचित चर्चा की जानकारी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय, ओ.बी.ओ. को बंद करने का निर्णय दुखद होने के साथ साथ संचालक मण्डल की मानसिक पराजय, थकान आदि…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"नीचे आए हुए संदेशों से यह स्पष्ट है कि अब भी कुछ लोग हैं जो जलते शहर को बचाने के लिए पानी आँख में…"
Monday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय जी  ओबीओ को बन्द करने की सूचना बहुत दुखद है । बहुत लम्बे समय से इसके साथ जुड़ा हूँ कुछ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओबीओ से पिछले बारह साल से जुड़ी हूँ। इसके बंद हो जाने की बात से मन भारी हो रहा है।मेरे कच्चे-पक्के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service