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पूरी रात वह सो नहीं पाया था, आँखों आँखों में ही बीती थी पिछली रात. लेकिन कमाल यह था कि न तो कोई थकान थी और न ही कोई झल्लाहट. उसे अच्छी तरह से याद था कि इसके पहले जब भी रात को जागना पड़ जाए या किसी वजह से रात को देर तक नींद नहीं आये तो अगला पूरा दिन उबासी लेते और थकान महसूस करते ही बीतता था. उसे हमेश यही लगता रहा कि कहीं वह छोटा सा बच्चा उससे दब न जाए और उसी चक्कर में वह हर आधे घंटे पर उठ उठकर उसे देखता रहा. और वह बच्चा भी पूरी रात उसके बिस्तर पर घूमता रहा, कभी सिरहाने तो कभी पैरों की तरफ.पूरी रात वह सो नहीं पाया था, आँखों आँखों में ही बीती थी पिछली रात. लेकिन कमाल यह था कि न तो कोई थकान थी और न ही कोई झल्लाहट. उसे अच्छी तरह से याद था कि इसके पहले जब भी रात को जागना पड़ जाए या किसी वजह से रात को देर तक नींद नहीं आये तो अगला पूरा दिन उबासी लेते और थकान महसूस करते ही बीतता था. उसे हमेश यही लगता रहा कि कहीं वह छोटा सा बच्चा उससे दब न जाए और उसी चक्कर में वह हर आधे घंटे पर उठ उठकर उसे देखता रहा. और वह बच्चा भी पूरी रात उसके बिस्तर पर घूमता रहा, कभी सिरहाने तो कभी पैरों की तरफ.इतना आसान नहीं था उस बच्चे को घर ले आना, घर के बाकी बच्चे तो कबसे यही चाहते थे और उससे गुहार भी लगा रहे थे. लेकिन पत्नी के विरोध के चलते वह ला नहीं पा रहा था. इसी बीच पडोसी ने भी एक प्यारा सा पपी लाकर जैसे उनकी पीड़ा को बढ़ा दिया. अब जब भी वह या बच्चे उस प्यारे पपी को देखते, उनकी इच्छा एकदम से अपने यहाँ भी लाने की होती. पिछले कई दिनों से लगभग रोज ही इस विषय पर चर्चा की शुरुआत होती लेकिन पत्नी के विरोध के चलते बात ख़त्म हो जाती. ये अलग बात थी कि वह बच्चों की आँखों में उदासी और बेचारगी नहीं देख पाता था. किसी तरह से तमाम मानमनौअल के चलते घर में पपी आया और उस प्यारे बच्चे को लेकर सोने के लिए काफी बहस हुई. आखिरकार फैसला उसके पक्ष में हुआ और वह प्यारा बच्चा उसके साथ ही सोया. पूरे दिन में वह रात के बारे में ही सोचता रहा कि आखिर ऐसा कैसे हुआ कि उसकी नींद रात भर खुलती रही. वर्ना तो वह सोने के लिए पूरे खानदान में बदनाम था, रात में एक बार सो गया तो बम भी फट जाए, उसकी नींद नहीं खुलती थी. फिर उसे याद आया बच्चों के जन्म के बाद पत्नी के रात भर जागने और सोने का. जरा सी आहट पर ही वह जाग जाती थी, कितनी बार वह बच्चों के लिए रात भर जागती रहती थी लेकिन सुबह चेहरे पर शिकन का नामोनिशान नहीं होता था. उसे बहुत आश्चर्य होता था कि आखिर वह ऐसे कैसे रह लेती है, वह पूछता भी था लेकिन पत्नी मुस्कुराकर टाल जाती थी.इन्हीं विचारों में वह डूब उतरा रहा था कि पत्नी की आवाज ने उसकी तन्द्रा तोड़ी "कहाँ खो गए जनाब, आज तो काफी अच्छा महसूस हो रहा होगा". उसने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया "हाँ आज बहुत अच्छा महसूस हो रहा है, आखिर आज मैंने मातृत्व को महसूस किया है". 


मौलिक एवम अप्रकाशित 

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Comment by विनय कुमार on February 11, 2021 at 3:46pm

इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on February 11, 2021 at 3:46pm

इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी

Comment by विनय कुमार on February 11, 2021 at 3:45pm

इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ नाथ सोनांचली जी

Comment by विनय कुमार on February 11, 2021 at 3:45pm

इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी

Comment by विनय कुमार on February 11, 2021 at 3:43pm

इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ कृष मिश्रा जान गोरखपुरी जी

Comment by TEJ VEER SINGH on February 11, 2021 at 12:13pm

बहुत खूबसूरत रचना | आद0 विनय कुमार जी हार्दिक बधाई।

Comment by नाथ सोनांचली on February 9, 2021 at 6:50pm

आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन।

अच्छी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 9, 2021 at 6:38pm

आ. भाई विनय कुमार जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on February 9, 2021 at 6:12pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब, अच्छी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 9, 2021 at 4:12pm

बहुत खूबसूरत रचना हुई है भाई विनय कुमार जी हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

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