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सदा - क्यों नहीं देते

221--1221--1221--122

1

आँखों में भरे अश्क गिरा क्यों नहीं देते

है दर्द अगर सबको बता क्यों नहीं देते

2

है जुर्म मुहब्बत तो सज़ा क्यों नहीं देते

गर रोग है तो इसकी दवा क्यों नहीं देते

3

तुम चाँद सितारों के तले उनको बुला कर

दिल में बसे चेहरे को दिखा क्यों नहीं देते

4

तूफ़ान से लड़ने का तुम्हें शौक़ है इतना

तो चप्पू समंदर में गिरा क्यों नहीं देते 

अक्सर जो तुम्हें ठगते है छल और कपट से

इक बार उन्हें तुम भी दग़ा क्यों नहीं देते

6

सच्चाई अगर मुल्क में ज़िंदा है अज़ीज़ो

इन्साफ़ को फिर लोग सदा क्यों नहीं देते

7

क़ुदरत की तुम्हें फ़िक्र अगर इतनी है 'निर्मल

तो धरती को ख़ुश रंग बना क्यों नहीं देते


मौलिक व अप्रकाशित

रचना निर्मल

दिल्ली 

Views: 782

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Comment by Rachna Bhatia on February 5, 2023 at 2:07pm

आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् आपके कहे अनुसार ऊला बदल लेती हूँ। ईश्वर आपका साया हम पर ताउम्र बनाए रखें। 

Comment by Samar kabeer on February 4, 2023 at 4:21pm

'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो

इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते'

ऊला यूँ कहें:-

'सच्चाई अगर मुल्क में ज़िंदा है अज़ीज़ो' 

Comment by Rachna Bhatia on February 4, 2023 at 4:17pm

आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती हूँ।

सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो

इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते 

सर् एक बार और देख लें प्लीज़।

हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Samar kabeer on February 3, 2023 at 2:18pm

//सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो

इंसाफ़ को फ़िर लोग बिना डर के सदा नहीं

देते //

सानी बह्र में नहीं है ।

Comment by Rachna Bhatia on February 2, 2023 at 8:45pm

आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्कार। हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Rachna Bhatia on February 2, 2023 at 8:44pm

आदरणीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Rachna Bhatia on February 2, 2023 at 8:43pm

आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। आदरणीय ग़ज़ल पर इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय: ।सर् आपके कहे अनुसार बदलाव कर लेती हूँ।

सर् 6ठें को इस तरह से कर सकते हैं क्या 

सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो

इंसाफ़ को फ़िर लोग बिना डर के सदा नहीं देते 

सादर।

Comment by Samar kabeer on January 29, 2023 at 2:20pm

मुह्तारमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I 

'गर दर्द है तो सबको बता क्यों नहीं देते'--- इस मिसरे को उचित लगे तो यूँ कहें :-

'है दर्द अगर सबको बता क्यों नहीं देते'

'इक दफ़्अ उन्हें तुम भी दग़ा क्यों नहीं देते'---'दफ़`अ ' शब्द के  इस्तेमाल से बहतर है "बार" शब्द का इस्तेमाल करें I 

उनकी तो है सरकार हमारे ग़म-ए-दिल तक 

इन्साफ़ को फिर होंठ सदा क्यों नहीं देते'

'उनकी तो है सरकार हमारे ग़म-ए-दिल तक 

इन्साफ़ को फिर होंठ सदा क्यों नहीं देते'-------इस शे`र के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है , देखें I 

'तो धरती को ख़ुश रंग हरा क्यों नहीं देते'---- इस मिसरे में 'हरा' की जगह "बना" शब्द उचित होगा I 

2

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 25, 2023 at 6:12pm

सुन्दर ग़ज़ल हुई आदरणीया बधाई

Comment by Chetan Prakash on January 17, 2023 at 10:38pm

आ.सु.श्री रचना भाटिया जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार कीजिए  !

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