For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

छोड़ दो काफ़ी सियासत हो गयी है

2122 2122 2122

.

जानते हैं तुम में ताकत हो गयी है,
और किस-किस पे ये आफत हो गयी है।

झूठ है जो, झूठ बिन कुछ भी नहीं, पर
अब जमाने में सदाक़त हो गयी है।

जब चमन का फूल होने का भरो दम,
क्यों चमन से ही अदावत हो गयी है?

जिस्म पर ठंडा लबादा, आग मुँह में,
जिसने रक्खे उसकी शुहरत हो गयी है।

कौम के अच्छे की खातिर काम हो अब,
छोड़ दो काफ़ी सियासत हो गयी है।

हर खुशी पर, मेरी बोलो तो भला क्यों,
तुमको बस रोने की  आदत हो गयी है?

मौलिक अप्रकाशित

Views: 820

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 15, 2020 at 7:29am

आदरणीय विनय निकोरे सर सादर आभार।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 15, 2020 at 7:28am

आदरणय रवि भसीन जी, सादर आभारं

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 15, 2020 at 7:28am

आदरणीय सौरभ सर, सादर हार्दिक आभारं

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 15, 2020 at 7:27am

आदरणीय भाई सुरेन्द्रनाथ जी, सादर हार्दिक आभार

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 15, 2020 at 7:26am

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सादरaabhaar

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 15, 2020 at 7:26am

eआदरणीय  आशीष यादव जी, हार्दिक आभारं

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 15, 2020 at 7:25am

आदरणीय प्रदीप देवीशरण जी, उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार

Comment by vijay nikore on January 7, 2020 at 3:08pm

गज़ल अच्छी बनी है। बधाई, मित्र सतविन्द्र जी।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 7, 2020 at 7:07am

हर तरह से हो चुकी समझाइशें पर 

नकचढ़ों को चिढ़ की आदत हो गयी है. 

हार्दिक बधाइयाँ, भाई सतविंदर जी.. 

शुभ-शुभ

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on January 6, 2020 at 7:42pm

आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। ख़ास तौर से आपका ये शे'अर बहुत अच्छा लगा:
कौम के अच्छे की खातिर काम हो अब
छोड़ दो काफ़ी सियासत हो गयी है

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
12 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
15 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
21 minutes ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
7 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service