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एक प्रश्न

 

अन्नदाता क्यूँ रोड़ पड़ा

निजीकरण का दौर बढ़ा

कोरोना की स्थिति विकट है

हर नागरिक क्यूँ मजबूर बड़ा||

 

नयें नियमों की अदला-बदली

भारत परिवर्तन की ओर बढ़ा

भविष्य का तो पता नहीं

पर आज बेरोजगारी का मुद्दा बड़ा ||

 

छोटे से लेकर बड़े व्यापारी तक

हर जन में क्यों आक्रोश बढ़ा

युवा रोजगार को तरस रहे

आज, आंदोलनों का क्यूँ शोर बड़ा ||

 

चकनाचूर है आर्थिक व्यवस्था

द्वेष भाव भी खूब बढ़ा

सौहार्द, सहभागिता की बात ना पूछो

आज हर वर्ग में क्यूँ भेद बड़ा ||

 

कहाँ कमी कुछ समझ ना आता

बैठकों में क्यूँ विचार-विमर्श का दौर बढ़ा

धार्मिक, राजनैतिक या सामाजिक कारण

आज प्रश्न ये सबसे बड़ा ||

 मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 5, 2020 at 4:42pm

आ. भाई फूल सिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on December 4, 2020 at 5:10pm

जनाब फूल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई, बधाई स्वीकार करें ।

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