For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रिश्वत खाना पाप नहीं है बाबाजी

नयन लड़ाना पाप नहीं है बाबाजी
प्यार जताना पाप नहीं है बाबाजी

अगर पड़ोसन पट जाये तो उसके घर
आना -  जाना पाप नहीं है बाबाजी

बीवी बोर करे तो कुछ दिन साली से
काम  चलाना पाप नहीं है बाबाजी

पत्नी रंगेहाथ पकड़ ले तो उसके
पाँव दबाना पाप नहीं है बाबाजी

रोज़ सुबह उठ, अपनी पत्नी की खातिर
चाय बनाना पाप नहीं है बाबाजी

वेतन से यदि कार खरीदी न जाये
रिश्वत खाना पाप नहीं है बाबाजी

'अलबेला' हर व्यक्ति यहाँ दुखियारा है
इन्हें हँसाना  पाप नहीं है  बाबाजी

-अलबेला खत्री

Views: 957

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rekha Joshi on July 14, 2012 at 7:31pm

'अलबेला' हर व्यक्ति यहाँ दुखियारा है 
इन्हें हँसाना  पाप नहीं है  बाबाजी , बहुत बढ़िया अलबेला जी ,किसी दुखियारे को हँसाना पाप नही पुण्य है बाबा जी ,बधाई 

Comment by Albela Khatri on July 14, 2012 at 6:46pm

आभारी हूँ आपके दुलार का ...प्यार का
जय हो आपकी भ्रमर जी......

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 14, 2012 at 6:39pm

वेतन से यदि कार खरीदी न जाये 
रिश्वत खाना पाप नहीं है बाबाजी 

'अलबेला' हर व्यक्ति यहाँ दुखियारा है 
इन्हें हँसाना  पाप नहीं है  बाबाजी 

 आदरणीय अलबेला जी ..बहुत अच्छा बीड़ा उठाया है आप ने या कहें की बीड़ा खाया है पान का ...

लोग तो अब सुपारी खाते हैं उनके नाम का खोखा ...इसे बचाओ बाबा जी 
भ्रमर ५  

 

Comment by Albela Khatri on July 14, 2012 at 6:29pm

धन्यवाद प्राची जी........


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 14, 2012 at 6:27pm
वाह आ. अलबेला जी, बहुत सुन्दर ग़ज़ल
Comment by Albela Khatri on July 14, 2012 at 1:58pm

धन्यवाद
बहुत बहुत धन्यवाद अरुण शर्मा जी.........
आभार

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 14, 2012 at 1:54pm

आदरणीय अलबेला जी.
हंसी से गूँथ कर ऐसे -२ शब्द गढ़ते हैं की पढ़ कर तबियत हरी हो जाती है. बधाई

Comment by Albela Khatri on July 14, 2012 at 11:54am

कहना मत किसी से  आदरणीय सीमा जी,
मैं भी नाटक ही कर रहा हूँ....समझ में तो मेरे भी कुछ नहीं आया ...हा हा हा

Comment by Albela Khatri on July 14, 2012 at 11:52am

गुरूदेव आये नहीं कई दिनों से.....
अँखियाँ प्यासी रे.....

एक विज्ञापन देना चाहिए...गुमशुदा की तलाश है ...हा हाँ हा

Comment by Albela Khatri on July 14, 2012 at 11:50am

ये सच है आदरणीय संदीप द्विवेदी जी,
बल्कि आप कहें  तो मैं पाँच रूपये के असली स्टाम्प पर भी लिख कर दे सकता हूँ कि मैं वहाँ आसानी से पहुँच  सकता हूँ जहाँ रेलगाड़ी नहीं जा सकती .....इसका कारण ये है कि  मैं पैदल चल लेता हूँ.........हा हा हा

इस बात का समर्थन  छतीस गढ़  में चित्रकोट  और तीर्थ गढ़ आदि प्राचीन झरनों पर चाय बेचने वाली  वह आदिवासी  बुज़ुर्ग महिला भी कर देगी जिसके यहाँ मैंने चार बार चाय पी थी  घबराहट के मारे...हा हा हा हा

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"यूॅं छू ले आसमाॅं (लघुकथा): "तुम हर रोज़ रिश्तेदार और रिश्ते-नातों का रोना रोते हो? कितनी बार…"
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"स्वागतम"
Sunday
Vikram Motegi is now a member of Open Books Online
Apr 28
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .पुष्प - अलि

दोहा पंचक. . . . पुष्प -अलिगंध चुराने आ गए, कलियों के चितचोर । कली -कली से प्रेम की, अलिकुल बाँधे…See More
Apr 28
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दयाराम जी, सादर आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई संजय जी हार्दिक आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दिनेश जी, सादर आभार।"
Apr 27
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय रिचा यादव जी, पोस्ट पर कमेंट के लिए हार्दिक आभार।"
Apr 27
Shyam Narain Verma commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: ग़मज़दा आँखों का पानी
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Apr 27

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service