For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघु-कवितायें -02 - डॉo विजय शंकर

मैं बड़ा ,
तू बड़ा ?
तू कैसे बड़ा ?
मैं सबसे बड़ा।
हर बड़े से बड़ा ,
बड़ों बड़ों से बड़ा।
मैं बड़बड़ा , मैं बड़बड़ा,
मैं सबसे बड़ा बड़बड़ा .
********************
हमको मालूम है कि
बातों से कुछ नहीं होता है ,
बस इसीलिये तो
हम बातें करते हैं , क्योंकि
बातों से किसी पक्ष को
कोई फरक नहीं पड़ता।
**********************

अच्छे को अच्छा कहने से
अपना क्या अच्छा होगा ,
अपने को अच्छा कहने से
अपना वो अच्छा न भी हो ,
अपना तो अच्छा ही होगा।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 556

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 22, 2016 at 5:38pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी , आपका ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद ,सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 22, 2016 at 9:46am

आदरनीय विजय भाई , आपकी तीनो लघु कवितायें आज के राजनैतिक स्थिति को बयाँ करने मे सक्षम हैं । हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 21, 2016 at 6:49pm
आदरणीय सुश्री राजेश कुमारी जी , आपको रचना पसंद आई , अच्छा लगा , आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 21, 2016 at 6:49pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी ,उत्साह वर्धन के लिए आभार और धन्यवाद , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 20, 2016 at 12:01pm

अच्छे को अच्छा कहने से
अपना क्या अच्छा होगा ,
अपने को अच्छा कहने से
अपना वो अच्छा न भी हो ,
अपना तो अच्छा ही होगा।----बहुत पते की बात की है 

अलग ही तरह की लघु कथाएँ गहन सार्थक भाव से समृद्ध 

हार्दिक बधाई आ० डॉ० विजय शंकर जी  

Comment by Shyam Narain Verma on June 20, 2016 at 10:57am
बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को आदरणीय | सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service