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रोला छंद .....

मधुशाला में जाम, दिवाने लगे  उठाने ।
अपने -अपने दर्द, जाम में लगे भुलाने ।
कसमें वादे प्यार ,सभी  हैं  झूठी  बातें ।
आँसू आहें अश्क, प्यार की हैं  सौग़ाते ।
-----------------------------------------------
दमके  ऐसे  गाल, साँझ की  जैसे  लाली ।
मृग शावक सी चाल ,चले देखो मतवाली ।
मदिरालय  से  नैन, करें  सबको  दीवाना ।
अधरों पर मुस्कान, प्यार का मधुर तराना ।

सुशील सरना / 29-3-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 458

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Comment by Sushil Sarna on April 9, 2022 at 1:14pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभारी है सर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 7, 2022 at 6:12am

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर छन्द हुए हैं। हार्दिक बधाई। 

Comment by Sushil Sarna on April 2, 2022 at 12:42pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सृजन को आत्मीय मान से सम्मानित करने का दिल से आभार

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 1, 2022 at 5:45pm

आदरणीय सुशील सरना सर, बहुत शानदार रोला छंद पद लिखे हैं आपने. बहुत बहुत बधाई. सादर 

Comment by Sushil Sarna on April 1, 2022 at 2:43pm
आदरणीय समर कबीर जी, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर
Comment by Samar kabeer on April 1, 2022 at 6:33am

जनाब सुशील  सरना जी आदाब,अच्छे रोला छंद लिखे हैं आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I 

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