For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा

मेरे सीने पर सितम की मश्क़ वो करते रहे

और मैं मासूम दिल की किर्चियाँ गिनता रहा

काम जब कुछ भी नहीं था ओबीओ पर दोस्तो

'नूर' साहिब की मैं कूड़ेदानियाँ गिनता रहा

मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी छोड़ीं रात भर महताबियाँ गिनता रहा

-----

पे ब पे---लगातार

मश्क़---अभ्यास

'नूर'---निलेश नूर

म्हताबियाँ---आतिश बाज़ी

'समर कबीर'

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 258

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on October 29, 2018 at 5:02pm

जनाब बलराम धाकर जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Balram Dhakar on October 29, 2018 at 3:01pm

आली मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब,

बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दाद के साथ मुबारक़बाद पेश है।

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा...क्या बात है, वाह!

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा...

बहुत खूब, शानदार !

Comment by Samar kabeer on July 27, 2018 at 2:56pm

जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by राज़ नवादवी on July 27, 2018 at 12:58pm

आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने. मतला क्या ख़ूब बना है,

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सादर. 

Comment by Samar kabeer on July 16, 2018 at 11:45pm

मुहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by babitagupta on July 16, 2018 at 9:00pm

बेहतरीन प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सरजी।

    मेरी बर्बादी पे खुश होकर.........गिनता रहा.

बहुत ही सही लगी 

Comment by Samar kabeer on July 14, 2018 at 10:48am

जनाब अजय तिवारी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Ajay Tiwari on July 14, 2018 at 5:59am

आदरणीय समर साहब, बहुत उम्दा अशआर हुए हैं. शिशुपाल के मिथक का इस्तेमाल बहुत प्रभावशाली है. हार्दिक बधाई. 

Comment by Samar kabeer on July 13, 2018 at 10:35pm

जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब, आपकी दूसरी टिप्पणी इस बात की शाहिद है कि ग़ज़ल आपकी पसंद पर खरी उतरी है, मेरा लिखना सार्थक हुआ,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ । 

Comment by vijay nikore on July 13, 2018 at 9:44pm

//मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी छोड़ीं रात भर महताबियाँ गिनता रहा//

वाह, भाई समर जी, इतनी अच्छी गज़ल कम ही मिलती है पढ़ने को। हर शेर के बाद सोचने के लिए रुकना पड़ा, हर शेर के लिए दिल से दाद देता हूँ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Jitendra sharma posted a blog post

लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल

दिन-भर जो बात करते रहे आस्मान सेसूरज ढला तो लौट के आये उड़ान सेथा वक़्त का ख़याल या हारे थकान सेनिकले…See More
14 minutes ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

Arms and ammunition (Poem)

 Guns and swordsSymbol of braveryUsed by soldiersFor country's victoryGuns and swordsSymbol of…See More
14 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी चित्रानुरूप सन्देश परक बेहतरीन दोहे के लिए हार्दिक बधाई"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी सादर अभिवादन चित्रानुरूप बहुत ही सुंदर दोहे सटीक भाव बहुत बहुत बधाई"
1 hour ago
Jitendra sharma commented on Jitendra sharma's blog post लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब।"
2 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"भरी बालटी दूध की, पकड  करे  शिशु  पान।मुख मंडल पर मात के, खिली देख…"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहावली [ प्रथम प्रस्तुति] ............................. मातु व्यस्त हैं काम में, कौन पिलाये दुग्ध।…"
7 hours ago
Bishwajit yadav updated their profile
9 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post यूँ इश्क का इक सुकून हूँ मैं..
"//कौन * जी ये काफ़िया गलत है । इसपर जानकारी चाहिए थी // इस पर क्या जानकारी चाहिए? //क्या किसी शब्द…"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आद0 सतविंद्र कुमार राणा जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आद0 दिगंबर नासवा जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
10 hours ago
rakesh gupta shared their blog post on Facebook
13 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service