For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा

मेरे सीने पर सितम की मश्क़ वो करते रहे

और मैं मासूम दिल की किर्चियाँ गिनता रहा

काम जब कुछ भी नहीं था ओबीओ पर दोस्तो

'नूर' साहिब की मैं कूड़ेदानियाँ गिनता रहा

मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी छोड़ीं रात भर महताबियाँ गिनता रहा

-----

पे ब पे---लगातार

मश्क़---अभ्यास

'नूर'---निलेश नूर

म्हताबियाँ---आतिश बाज़ी

'समर कबीर'

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 149

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on July 27, 2018 at 2:56pm

जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by राज़ नवादवी on July 27, 2018 at 12:58pm

आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने. मतला क्या ख़ूब बना है,

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सादर. 

Comment by Samar kabeer on July 16, 2018 at 11:45pm

मुहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by babitagupta on July 16, 2018 at 9:00pm

बेहतरीन प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सरजी।

    मेरी बर्बादी पे खुश होकर.........गिनता रहा.

बहुत ही सही लगी 

Comment by Samar kabeer on July 14, 2018 at 10:48am

जनाब अजय तिवारी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Ajay Tiwari on July 14, 2018 at 5:59am

आदरणीय समर साहब, बहुत उम्दा अशआर हुए हैं. शिशुपाल के मिथक का इस्तेमाल बहुत प्रभावशाली है. हार्दिक बधाई. 

Comment by Samar kabeer on July 13, 2018 at 10:35pm

जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब, आपकी दूसरी टिप्पणी इस बात की शाहिद है कि ग़ज़ल आपकी पसंद पर खरी उतरी है, मेरा लिखना सार्थक हुआ,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ । 

Comment by vijay nikore on July 13, 2018 at 9:44pm

//मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी छोड़ीं रात भर महताबियाँ गिनता रहा//

वाह, भाई समर जी, इतनी अच्छी गज़ल कम ही मिलती है पढ़ने को। हर शेर के बाद सोचने के लिए रुकना पड़ा, हर शेर के लिए दिल से दाद देता हूँ।

Comment by Samar kabeer on July 13, 2018 at 6:25pm

जनाब बृजेश कुमार'ब्रज' जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on July 13, 2018 at 6:24pm

जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शैतानियत और कलम" (लघुकथा)
"अच्छा कटाक्ष किया है आदरणीय वर्तमान सामाजिक सोच पे..."
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - पहल हो गई
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय..."
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amita tiwari's blog post कुछ भी नहीं बोलती जानकी कभी
"वाह...क्या ही शानदार रचना पढ़ने को मिली...पढ़ते हुए भाव अंतस में उतर गया और यही किसी भी रचना के…"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"वाह आदरणीय शर्मा जी बहुत ही सुन्दर गीत् रचा है..."
5 hours ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जीवन में लड़ाते हैं क्यों यार गढ़े मुर्दे - गजल
"आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. गढ़े > गड़े"
5 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ अजय तिवारी जी"
5 hours ago
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post शह्र अपना है बंट गया देखो------ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. दर्द या के खुशी के हों आँसू > दर्द के या…"
5 hours ago
Ajay Tiwari commented on Sushil Sarna's blog post पति ब्रांड ...
"आदरणीय सुशील जी, हास्य पैदा करना एक मुश्किल काम है और यह काम आपकी यह कविता {या संस्मरण :)))...}…"
5 hours ago
Ajay Tiwari commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"आदरणीय विनय जी, एक और अच्छी लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई."
5 hours ago
Vikas Sharma 'Daksh' shared their discussion on Facebook
5 hours ago
विनय कुमार posted blog posts
5 hours ago
Ajay Tiwari commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...तितलियाँ अब मौन हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी,  \\लेकिन छोटी बच्चियों की तुलना अक्सर हम तितलियों से करते हैं जो खिलखिलाती…"
5 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service