For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ये रंजिश का दौर नया है ,
हाँ, साज़िश का दौर नया है ।
कितने बेबस चहरे देखो ,
फिर यूरिश का दौर नया है ।
हम क्या खायें, क्या पहनें अब ,
बस, काविश का दौर नया है ।
भाई-भाई का दुश्मन है ,
ये सोज़िश का दौर नया है ।
शक हर इक पर है अब यारो ,
हाँ, पुरसिश का दौर नया है ।
धन-दौलत के दीवाने सब ,
पैमाइश का दौर नया है ।
सूखी-सूखी नदियाँ हैं सब ,
अब बारिश का दौर नया है ।
शब्दार्थ:--
यूरिश-हमला
सोज़िश-जलन
काविश-तलाश
परसिश-पूछताछ
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Views: 1831

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mohammed Arif on July 22, 2017 at 8:06am
बहुत-बहुत शुक्रिया मोहतरम तस्दीक अहमद साहब ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 21, 2017 at 10:09pm
मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है ,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
Comment by Mohammed Arif on July 21, 2017 at 1:23pm
ग़ज़ल पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देकर कृतार्थ करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय विजय निकोर जी ।
Comment by vijay nikore on July 21, 2017 at 11:27am

//भाई-भाई का दुश्मन है ,
ये सोज़िश का दौर नया है ।
शक हर इक पर है अब यारो ,
हाँ, पुरसिश का दौर नया है ।//

बहुत ही खूबसूरत गज़ल लिखी है, खयाल बहुत अच्छे उतरे हैं। दिल से बधाई, भाई मोहम्मद आरिफ़ जी।

Comment by Mohammed Arif on July 21, 2017 at 9:53am
बहुत-बहुत आभार आदरणीय गुरप्रीत जी ।
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 21, 2017 at 9:18am

अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी,, कुछ नए शब्द भी पता चले आप की इस ग़ज़ल के माध्यम से, 

Comment by Mohammed Arif on July 20, 2017 at 11:06pm
हृदयतल से आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी जी । लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by Mohammed Arif on July 20, 2017 at 11:05pm
हृदयतल से आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । लेखन सार्थक हुआ ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2017 at 8:30pm

आदरणीय आरिफ भाई , खूब सूरत गज़ल के लिये बधाइयाँ स्वीकार करे ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 20, 2017 at 8:02pm
आ. भाई आरिफ जी अच्छी गजल हुई है ।हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
6 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
20 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service