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सावन की ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/22)

मन में आग लगाये सावन ,
यौवन को भड़काये सावन ।
दो दिल मचल रहे हैं देखो ,
ऐसा राग सुनाये सावन ।
छैल-छबीला , रंगीला-सा ,
बाग़ों में इतराये सावन ।
छन-छन छन-छन करता छत पर
बेहद शोर मचाये सावन ।
खेतों में हरियाली लाये ,
संग घटा के छाये सावन ।
मस्ती में जब झूमे नाचे
ऐसा रंग जमाये सावन ।
गीत मिलन के गाता है ये
झूलों में इठलाये सावन ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Mohammed Arif on July 20, 2017 at 11:03pm
हृदयतल से आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी जी ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2017 at 11:29am

आदरणीय आरिफ़ भाई , खूब सूरत सावनी गज़ल के लिये हृदय से बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on July 19, 2017 at 11:12pm
हौसला अफ़ज़ाई का हृदय तल से आभार आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी । लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on July 19, 2017 at 5:58pm
वाहहहहह मोहम्मद आरिफ जी बधाई।

मनभावन ग़ज़ल सुहानी है
आरिफ जी हरषाये सावन।
Comment by Mohammed Arif on July 19, 2017 at 2:04pm
बहुत-बहूत आभार बृजेंद्र कुमार जी ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 19, 2017 at 10:20am
वाह वाह आदरणीय आरिफ जी बहुत ही सुन्दर सरस ग़ज़ल कही है..बधाइयाँ
Comment by Mohammed Arif on July 19, 2017 at 8:19am
बहुत-बहुत आभार आभार आदरणीय नरेंद्रसिंह जी ।
Comment by Mohammed Arif on July 19, 2017 at 8:18am
मोहतरम आली जनाब समर कबीर साहब आदाब,ग़ज़ल की सराहना और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत-बहुत शुक्रिया ।
Comment by narendrasinh chauhan on July 18, 2017 at 4:10pm

सुन्दर रचना 

Comment by Samar kabeer on July 18, 2017 at 3:17pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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